एक्स रिपोर्टर न्यूज़ । राजनांदगांव
छुरिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 7,28,610 रुपये के ‘भोजन बिल’ अनियमितता को दबाने और लेखापाल को सुरक्षित रिटायरमेंट दिलाने का खेल अब पूरी तरह बेनकाब हो चुका है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय राजनांदगांव द्वारा जारी ताजा पत्र ने यह साफ कर दिया है कि विभाग निष्पक्ष जांच नहीं, बल्कि शिकायतकर्ता को ही मानसिक रूप से प्रताड़ित करने की साजिश रच रहा है।
जब सारे सबूत खुद विभाग ने दिए, तो फिर साक्ष्य कैसा?
इस पूरे मामले का सबसे हास्यास्पद और शर्मनाक पहलू यह है कि शिकायतकर्ता ने हवा में आरोप नहीं लगाए हैं। उन्होंने वित्तीय अनियमितता के ये सारे पुख्ता दस्तावेज सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत खुद स्वास्थ्य विभाग से आधिकारिक रूप से प्राप्त किए हैं।
विभाग के ही मुहर लगे दस्तावेजों से यह साबित हो चुका है कि बिना कलेक्टर या संचालक की अनुमति के पिछले वित्तीय वर्ष के 6.33 लाख और 94 हजार रुपये के बिलों को गुपचुप तरीके से ठिकाने लगाया गया। अब सवाल यह उठता है कि जब सारे सबूत खुद स्वास्थ्य विभाग के सरकारी रिकॉर्ड से निकले हैं, तो जांच समिति शिकायतकर्ता से दोबारा कौन सा ‘साक्ष्य और अभिलेख’ मांग रही है? क्या विभाग को अपने ही आधिकारिक दस्तावेजों पर भरोसा नहीं है, या फिर यह सिर्फ समय काटने की रणनीति है?
मुख्यालय में हुई शिकायत, तो बयान के लिए छुरिया क्यों बुलाया?
CMHO कार्यालय के प्रभारी जांच समिति ने पत्र जारी कर शिकायतकर्ता को ‘सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र छुरिया’ में उपस्थित होने का फरमान सुनाया है। यह सीधे तौर पर शिकायतकर्ता को परेशान करने का पैंतरा है:
तर्कहीन व्यवस्था: शिकायत जिला मुख्यालय (राजनांदगांव) में दर्ज कराई गई है। नियमतः जांच और बयान की प्रक्रिया मुख्यालय में होनी चाहिए।
साजिश की बू: मुख्यालय के बड़े अधिकारियों का छुरिया जाकर जांच करने के बजाय शिकायतकर्ता को वहां बुलाना यह दर्शाता है कि स्थानीय स्तर पर दबाव बनाकर मामले को रफा-दफा करने का माहौल तैयार किया जा रहा है।
रिटायरमेंट से पहले ‘क्लीन चिट’ देने की जल्दबाजी
जैसा कि पहले ही अंदेशा था, लेखापाल के आगामी रिटायरमेंट को देखते हुए विभाग बेहद जल्दबाजी में है। जांच समिति का यह रवैया साफ करता है कि उनका मकसद सच खोजना नहीं, बल्कि शिकायतकर्ता को इतनी औपचारिकताएं और चक्करों में उलझा देना है कि वह थक कर पीछे हट जाए। इस बीच लेखापाल बिना किसी विभागीय कार्रवाई के शान से रिटायर हो जाए।
‘सुशासन तिहार’ के नाम पर जनता से धोखा
यह पूरी कागजी कसरत छत्तीसगढ़ सरकार के ‘सुशासन तिहार’ के दावों की धज्जियां उड़ा रही है। मुख्यमंत्री सचिवालय और जिला कलेक्टर को इस बात का संज्ञान लेना चाहिए कि कैसे उनके नाक के नीचे आरटीआई के पक्के सबूतों को दरकिनार कर नियम विरुद्ध कार्य करने वाले कर्मचारियों को सेफ एग्जिट दिया जा रहा है।
*******


