एक्स रिपोर्टर न्यूज़ । राजनांदगांव
सरकारी खजाने को अपना निजी बैंक समझने वाले भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों ने अब मरीजों के निवाले पर भी डाका डालना शुरू कर दिया है। राजनांदगांव जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) छुरिया से वित्तीय हेराफेरी का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने स्वास्थ्य विभाग के ‘सिस्टम’ की धज्जियां उड़ा कर रख दी हैं। लाखों रुपये के पुराने बिलों को गुपचुप तरीके से ठिकाने लगाने की इस साजिश ने राजनांदगांव स्वास्थ्य विभाग के लेखापाल की कार्यप्रणाली को सीधे कटघरे में खड़ा कर दिया है।
पिछली तारीखों का ‘खेल’ और नियमों की धज्जियां
सामने आई शिकायत के मुताबिक, यह पूरा मामला 7,28,610 रुपये के संदिग्ध भुगतान का है। हैरानी की बात यह है कि वित्तीय वर्ष 2023-24 के बिलों को साल भर तक दबा कर रखा गया और 2024-25 में उन्हें पास कराने का ‘जुगाड़’ बिठाया गया।
नियम कहते हैं कि पिछले साल के बिलों के भुगतान के लिए कलेक्टर या संचालक की लिखित अनुमति अनिवार्य है, लेकिन यहाँ तो अंधेर नगरी-चौपट राजा वाला हाल है! लेखापाल ने किसी भी उच्च अधिकारी की अनुमति लेना जरूरी नहीं समझा। सवाल यह उठता है कि क्या यह महज एक ‘भूल’ है या फिर इसके पीछे किसी बड़े कमीशन का खेल चल रहा है?
मरीजों और गर्भवती महिलाओं के हक पर डाका?
शिकायत पत्र की परतें खोलें तो पता चलता है कि:
6.33 लाख रुपये मरीजों के भोजन के नाम पर निकाले गए हैं। 94 हजार से ज्यादा की राशि जननी शिशु सुरक्षा योजना के तहत डकारी गई है।
गरीब मरीजों और गर्भवती महिलाओं के पोषण के लिए आने वाले पैसे में इस तरह की ‘वित्तीय बाजीगरी’ करना न सिर्फ नियम विरुद्ध है, बल्कि यह एक नैतिक अपराध भी है। क्या विभाग के पास इतने महीनों तक इन बिलों की सुध लेने का समय नहीं था? या फिर जानबूझकर ‘सेटिंग’ के लिए इंतजार किया जा रहा था?
निलंबन या सिर्फ खानापूर्ति?
छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियमों का हवाला देते हुए दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है। मांग सिर्फ जांच की नहीं, बल्कि तत्काल निलंबन और रिकवरी की है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या राजनांदगांव CMHO इस मामले में कोई ठोस एक्शन लेंगे, या फिर हर बार की तरह जांच की फाइल को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?
प्रशासन को सीधी चुनौती
यह शिकायत प्रशासन के चेहरे पर एक तमाचा है। अगर बिना अनुमति के लाखों का भुगतान करने की हिम्मत एक लेखापाल दिखा रहा है, तो समझ लीजिए कि भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं। जनता जवाब मांग रही है—भ्रष्टाचार के इस ‘भोजन’ में और कितने सफेदपोशों के हाथ रंगे हैं?
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