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एक्स रिपोर्टर न्यूज़ । राजनांदगांव
प्रदेश में आबकारी विभाग की नाक के नीचे मदिरा प्रेमियों की जेब पर डाका डालने का खेल बदस्तूर जारी है। ताज़ा मामला राजनांदगांव जिले के घुमका स्थित कंपोजिट मदिरा दुकान का है, जहाँ ‘ओवररेट’ के सिंडिकेट ने सारी हदें पार कर दीं। दिनांक 01 मई 2026 को राज्य स्तरीय उड़नदस्ते की छापेमारी ने इस काले धंधे की कलई खोलकर रख दी है, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या ये सिर्फ एक कार्यवाही है या फिर व्यवस्था की मिलीभगत का एक छोटा सा नमूना?
1360 का माल 1500 में: लूट का गणित समझिए
घुमका शराब दुकान में तैनात सेल्समैन कृष्णा राजपूत पिता तिजू राजपूत, जो मूलतः चिखली मदिरा दुकान का मल्टी कर्मचारी है, ने ईमानदारी को ताक पर रखकर ग्राहकों को लूटने का नया रिकॉर्ड बनाया। कार्यवाही के दौरान पाया गया कि 17 नग ‘शोले’ देशी मदिरा पाव, जिनकी निर्धारित कीमत 1360 रुपये थी, उन्हें धड़ल्ले से 1500 रुपये में बेचा जा रहा था। यानी सीधे-सीधे 140 रुपये की अवैध वसूली!
यह महज एक सेल्समैन की मनमानी नहीं है, बल्कि एक सोची-समझी लूट है। जब एक ही दिन में चंद पाव पर इतनी वसूली हो रही है, तो महीने भर का हिसाब लाखों-करोड़ों में पहुँचता होगा। आखिर यह ‘ऊपर का पैसा’ किसकी जेब में जा रहा है?
आदतन अपराधी: रेवाडीह के बाद अब घुमका की बारी
हैरानी की बात यह है कि इसी महीने में आबकारी विभाग की यह दूसरी बड़ी कार्यवाही है। इससे पहले रेवाडीह मदिरा दुकान में भी ओवररेटिंग का मामला देखने को मिला था। बार-बार हो रही इन कार्यवाहियों से साफ है कि मदिरा दुकानों के संचालकों और कर्मचारियों के मन में कानून का रत्ती भर भी खौफ नहीं है।
घुमका दुकान पर हुई यह कार्यवाही यह साबित करती है कि मदिरा दुकानों में तैनात कर्मचारी खुद को ‘सिस्टम का दामाद’ समझने लगे हैं। कृष्णा राजपूत जैसे कर्मचारी एक दुकान से दूसरी दुकान (चिखली से घुमका) जाकर भ्रष्टाचार का वायरस फैला रहे हैं।
सिस्टम सो रहा है या हिस्सेदारी ले रहा है?
आम जनता सवाल पूछ रही है कि जब उड़नदस्ता कार्यवाही कर सकता है, तो स्थानीय आबकारी अधिकारी आँखों पर पट्टी बांधकर क्यों बैठे रहते हैं? क्या उन्हें अपने क्षेत्र की दुकानों में हो रही इस लूट की भनक नहीं लगती? या फिर ‘कमीशन का खेल’ इतना मजबूत है कि आला अधिकारी भी चुप्पी साधे हुए हैं?
हर बार कार्यवाही के नाम पर एक छोटा सा जुर्माना या नोटिस देकर खानापूर्ति कर दी जाती है, और अगले ही दिन से फिर वही लूट शुरू हो जाती है। जब तक इन ‘जेबकतरों’ और इनके आकाओं पर सख्त दंडात्मक कार्यवाही नहीं होगी, तब तक मदिरा दुकानों में यह अवैध वसूली बंद नहीं होगी।
आबकारी विभाग की साख दांव पर
राज्य स्तरीय उड़नदस्ते की इस कार्यवाही ने अधिकारियों की पोल खोल दी है। जनता अब केवल ‘कार्यवाही’ के आश्वासन से संतुष्ट नहीं होने वाली। घुमका और रेवाडीह जैसी दुकानों पर नकेल कसना जरूरी है।
क्या विभाग कृष्णा राजपूत जैसे भ्रष्ट कर्मचारियों को बर्खास्त करने की हिम्मत दिखाएगा? या फिर अगले महीने किसी तीसरी दुकान में फिर से ‘ओवररेट’ की खबरें हेडलाइन बनेंगी? आबकारी विभाग की साख दांव पर है, और जनता की नजरें उनकी अगली चाल पर!
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