एक्स रिपोर्टर न्यूज़ । राजनांदगांव
छत्तीसगढ़ में एक तरफ सरकार ‘सुशासन तिहार 2026’ मनाकर घर-घर समाधान पहुँचाने का ढिंढोरा पीट रही है, तो दूसरी तरफ राजनांदगांव जिले का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) छुरिया भ्रष्टाचार के कीचड़ में पूरी तरह सना हुआ है। लाखों रुपये के ‘भोजन बिल’ अनियमितता की लिखित शिकायत हुए कई हफ्ते बीत चुके हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर प्रशासन की रहस्यमयी चुप्पी यह सवाल खड़ा कर रही है कि क्या यह ‘सुशासन’ सिर्फ कागजों तक सीमित है?
शिकायत रद्दी की टोकरी में, भ्रष्टाचार खुलेआम!
मरीजों के निवाले और जननी शिशु सुरक्षा योजना के फंड में 7,28,610 रुपये की अनियमितता के पुख्ता प्रमाणों के साथ शिकायत स्वास्थ्य विभाग को दी गई थी। नियमों को ताक पर रखकर पिछले वित्तीय वर्ष के बिलों का भुगतान बिना अनुमति करने वाले स्वास्थ्य विभाग के लेखापाल पर अब तक गाज क्यों नहीं गिरी?
क्या जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी किसी बड़े राजनीतिक दबाव में हैं? या फिर जांच के नाम पर सिर्फ समय काटा जा रहा है ताकि सबूतों के साथ छेड़छाड़ की जा सके?
सुशासन तिहार का मखौल उड़ाता ‘सिस्टम’
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि ‘सुशासन तिहार’ के दौरान जनसमस्याओं का तत्काल समाधान होना चाहिए। लेकिन राजनांदगांव स्वास्थ्य विभाग में तो उलटी गंगा बह रही है। यहाँ ‘समाधान’ नहीं, बल्कि ‘संरक्षण’ का खेल चल रहा है।
सवाल 1: जब शिकायत में साफ है कि बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के पुराने बिलों को पास करने की साजिश रची गई, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
सवाल 2: क्या गरीबों के हक के पैसे को डकारने की योजना बनाने वाले कर्मचारी को ‘सुशासन’ के नाम पर इनाम दिया जा रहा है?
जनता की गाढ़ी कमाई पर डाका और अधिकारियों की सुस्ती
हैरानी की बात है कि जहाँ प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की बात कही जा रही है, वहीं स्वास्थ्य विभाग में वित्तीय अनुशासनहीनता का खुला नाच चल रहा है। 94 हजार रुपये से ज्यादा की राशि जो गर्भवती महिलाओं के पोषण के लिए थी, उसे कागजी बाजीगरी से इधर उधर करने की कोशिश की गई। इसके बावजूद संबंधित कर्मचारी का खुलेआम घूमना सरकार के ‘सुशासन’ के दावों की हवा निकाल रहा है।
सम्बंधित अधिकारी-कर्मचारी को तत्काल निलंबित करें प्रशासन
यदि ‘सुशासन तिहार’ का मकसद वाकई भ्रष्टाचार को जड़ से मिटाना है, तो छुरिया CHC बैक डेट भोजन बिलिंग अनियमितता मामले में संलिप्त स्वास्थ्य विभाग के लेखापाल और उसे शह देने वाले अधिकारियों को तत्काल निलंबित किया जाना चाहिए। अगले कुछ दिनों में ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि प्रशासन भ्रष्टाचार की ढाल बना हुआ है। ‘सुशासन’ सिर्फ दिखावे के लिए है।
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