एक्स रिपोर्टर न्यूज़ । राजनांदगांव
जब रक्षक ही भक्षक बन जाए और जांच करने वाले ही जांच में घिरे व्यक्ति की ढाल बन जाएं, तो न्याय की उम्मीद किससे की जाए? राजनांदगांव जिला अस्पताल के डॉ. तरुण कोठारी के खिलाफ की गई शिकायत अब एक बड़े प्रशासनिक घोटाले का रूप ले चुकी है। मामला सिर्फ एक डॉक्टर के नियम विरुद्ध निजी क्लीनिक चलाने का नहीं रहा, बल्कि अब सवाल जिला अस्पताल प्रबंधन की नीयत पर भी उठ रहे हैं।
28 अक्टूबर 2025: वो तारीख जब भ्रष्टाचार के सबूत सौंपे गए
बता दें कि 28 अक्टूबर 2025 को सिविल सर्जन, राजनांदगांव को दस्तावेजों के साथ एक लिखित शिकायत सौंपी थी। इसमें स्पष्ट प्रमाण दिए गए थे कि डॉ. तरुण कोठारी सरकारी आवास का लाभ लेने के बावजूद शहर के एक कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में धड़ल्ले से अपना निजी क्लीनिक संचालित कर रहे हैं। यह छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियमों का सीधा उल्लंघन है।
कार्रवाई तो दूर, ‘शिकायत पत्र’ ही हो गया गायब!
हैरानी की बात यह है कि इस शिकायत पर कार्रवाई करने के बजाय, अस्पताल प्रशासन ने इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया। सूत्रों के हवाले से खबर है कि शिकायत पत्र को ही कार्यालय से ‘घुमा’ (गायब) दिया गया है। 6 महीने से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी न तो डॉ. कोठारी को कोई नोटिस जारी हुआ, न ही उनके क्लीनिक पर कोई जांच टीम पहुंची।
अस्पताल प्रबंधन की चुप्पी पर उठते गंभीर सवाल
आखिर अस्पताल प्रबंधन की ऐसी क्या मजबूरी है कि वे एक नियम विरुद्ध कार्य करने वाले डॉक्टर को खुला संरक्षण दे रहे हैं?
क्या अस्पताल प्रशासन और डॉ. कोठारी के बीच कोई ‘अदृश्य सेटिंग’ हो चुकी है?
क्या रसूखदार डॉक्टर के आगे सरकारी नियम बौने साबित हो रहे हैं?
शिकायत पत्र का गायब होना क्या किसी बड़ी साजिश का हिस्सा है ताकि भविष्य में कोई सबूत न बचे?
जनता के पैसे का दुरुपयोग और नियमों को अंगूठा
एक तरफ जिला अस्पताल में आने वाले गरीब मरीज डॉक्टरों के इंतजार में घंटों लाइन में लगे रहते हैं, वहीं दूसरी ओर जिला अस्पताल के ही डॉक्टर सरकारी वेतन और बंगला लेकर अपने प्राइवेट अड्डों पर नोट छाप रहे हैं। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने पहले ही सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर कड़ी टिप्पणी की है, लेकिन राजनांदगांव जिला अस्पताल में जैसे अपना ही ‘जंगल राज’ चल रहा है।
अब सीधे ‘ऊपर’ होगी बात
प्रशासनिक सुस्ती और फाइल दबाने के इस खेल से आक्रोशित होकर शिकायतकर्ता ने अब मोर्चा खोल दिया है। यदि जल्द से जल्द अस्पताल प्रबंधन ने इस पर जवाब नहीं दिया, तो मामले की लिखित शिकायत और फाइल दबाने के सबूतों के साथ उच्च अधिकारियों के समक्ष पेश होकर पूरे ‘नेक्सस’ का पर्दाफाश किया जाएगा।
राजनांदगांव की जनता पूछ रही है- साहब, कार्रवाई कब होगी? या फिर रसूखदारों के लिए नियम अलग और आम जनता के लिए अलग हैं?
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