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एक्स रिपोर्टर न्यूज़ । राजनांदगांव

एक तरफ सरकार बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर कुछ ‘सफेदपोश’ सरकारी नियमों की धज्जियां उड़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। राजनांदगांव जिला अस्पताल के एक नियमित डॉक्टर पर लगे गंभीर आरोपों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्या है पूरा मामला?
सिविल सर्जन को सौंपी गई एक शिकायत में डॉ. तरुण कोठारी (एमएस गायनी) पर नियमों के खिलाफ जाकर एक कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में निजी क्लीनिक चलाने का सनसनीखेज आरोप लगा है। शिकायत के अनुसार, डॉ. कोठारी सरकारी आवास का लाभ भी ले रहे हैं, जबकि नियमानुसार उन्हें केवल अपने सरकारी आवास में ही प्रैक्टिस करने की अनुमति है।

नियमों को ठेंगे पर रख चल रहा ‘निजी धंधा’
इस शिकायत में आरटीआई (RTI) से प्राप्त दस्तावेजों का हवाला देते हुए खुलासा किया गया है कि: डॉ. कोठारी को सरकारी आवास आवंटित है, फिर भी वे बाहर कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में क्लीनिक चला रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग ने सबकुछ जानते हुए भी डॉक्टर को निजी क्लीनिक संचालन के लिए लाइसेंस जारी कर दिया है।
जिला अस्पताल में उनकी नियमित उपस्थिति को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं, क्या वे सरकारी ड्यूटी के समय भी निजी मरीजों को देख रहे हैं?

‘न सेवा, न अनुशासन’, केवल नियमों का उल्लंघन!
शिकायतकर्ता का कहना है कि यह कृत्य छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियमों का खुला उल्लंघन है। नियमों के मुताबिक, इस तरह की मनमानी पर अनुशासनात्मक कार्रवाई और सेवा से बर्खास्तगी का प्रावधान है। लेकिन सवाल यह है कि क्या प्रशासन इन रसूखदार डॉक्टरों पर लगाम कस पाएगा?
अब देखना यह है कि क्या सिविल सर्जन इस भ्रष्टाचार और नियम विरुद्ध कार्य पर ‘सर्जरी’ करते हैं या फिर विभागीय मिलीभगत के चलते फाइल को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?

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