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एक्स रिपोर्टर न्यूज़ । राजनांदगांव

राजनांदगांव का आबकारी विभाग इस समय भ्रष्टाचार का पर्याय बन चुका है। बाबू रामसिंह पाटिल के वायरल ऑडियो को सामने आए कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर प्रशासन का ‘मौन’ यह साबित करने के लिए काफी है कि दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है। शिकायतकर्ता द्वारा साक्ष्य सौंपे जाने के बावजूद अधिकारियों की रहस्यमयी चुप्पी अब जनता के सब्र का बांध तोड़ रही है।

कुंभकर्णी नींद में सोया प्रशासन या जानबूझकर बंद की गई आंखें?
हैरानी होती है यह देखकर कि जिस ऑडियो में अवैध शराब की सेटिंग और कमीशन का खुला खेल सुनाई दे रहा है, उसे विभाग ‘जांच का विषय’ बताकर टाल रहा है। आखिर और कितने सबूत चाहिए? क्या विभाग इस इंतजार में है कि भ्रष्टाचार के ये आरोपी खुद आकर अपना गुनाह कबूल करें? जिले के आबकारी अधिकारियों की यह सुस्ती साफ इशारा करती है कि कहीं न कहीं ‘ऊपर तक’ इस बंदरबांट के तार जुड़े हुए हैं। क्या बाबू रामसिंह पाटिल सिर्फ एक मोहरा है, जिसका इस्तेमाल बड़े शिकारी कर रहे हैं?

कोचिया राज को सरकारी खाद-पानी
जब रक्षक ही बिचौलियों की भूमिका निभाने लगें, तो व्यवस्था का दम निकलना लाजमी है। राजनांदगांव के गली-मोहल्लों में जो अवैध शराब की नदियां बह रही हैं, उसका असली स्रोत सरकारी दफ्तरों की इन्हीं कुर्सियों पर बैठा है। बाबू पाटिल का ऑडियो महज एक ट्रेलर है; पूरी फिल्म तो उन आलीशान कमरों में चल रही है जहाँ बैठकर कोचियों की लिस्ट और उनसे आने वाले हफ़्तों का हिसाब किताब रखा जाता है। यह प्रशासन की नाकामी नहीं, बल्कि सरेआम की जा रही आपराधिक लापरवाही है।

साख पर बट्टा और ‘साहब’ का संरक्षण
चर्चा आम है कि विभाग के आला अधिकारी अपने चहेते कर्मचारियों को बचाने के लिए जांच की फाइल को फुटबॉल बना रहे हैं। कभी एक मेज से दूसरी मेज, कभी एक दफ्तर से दूसरा दफ्तर—प्रक्रियाओं के नाम पर समय काटना सिर्फ और सिर्फ संबंधित कर्मचारी को ‘क्लीन चिट’ दिलवाने की साजिश है। अगर अफसर के पास ऑडियो मौजूद है, तो अब तक एफआईआर दर्ज क्यों नहीं हुई? क्यों नहीं उस कथित बाबू को निलंबित कर विभागीय जांच बिठाई गई?

सवाल जो चुभेंगे:
सहायक आयुक्त महोदय, क्या आपको अपने विभाग में हो रही इस सरेआम लूट की खबर नहीं है, या आप भी इसे ‘सिस्टम का हिस्सा’ मान चुके हैं?

जिला प्रशासन, क्या एक रसूखदार कर्मचारी को बचाने के लिए कानून की धज्जियां उड़ाई जा सकती हैं?

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