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एक्स रिपोर्टर न्यूज़ । राजनांदगांव

छुरिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों के भोजन बजट और जननी शिशु सुरक्षा योजना की राशि में हुई 7,28,610 रुपये की वित्तीय हेराफेरी के मामले में एक बेहद चौंकाने वाला और गंभीर खुलासा हुआ है। सूत्रों से मिली पक्की जानकारी के अनुसार, संबंधित लेखापाल अगले कुछ ही महीनों में सेवानिवृत्त होने वाला है। बस यही वह असली वजह है जिसके कारण मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय राजनांदगांव इस पूरे मामले पर कड़ा एक्शन लेने के बजाय ‘जांच कमेटी’ का नाटक रचकर फाइल को ठंडे बस्ते में डालने की पुरजोर कोशिश कर रहा है।

विभागीय सांठगांठ: ‘रिटायर हो जाने दो, मामला खुद खत्म हो जाएगा’
स्वास्थ्य विभाग के गलियारों में चल रही सुगबुगाहट के अनुसार, इस पूरे खेल के पीछे एक सोची-समझी क्रोनोलॉजी काम कर रही है। नियम कहते हैं कि यदि किसी कर्मचारी पर वित्तीय अनियमितता साबित हो जाती है, तो उसकी पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य सेवानिवृत्ति लाभ रोक दिए जाते हैं।
आरोप है कि विभाग के कुछ बड़े साहब अपने चहेते लेखापाल को इस कानूनी फंदे से बचाने के लिए ढाल बने हुए हैं। रणनीति बेहद साफ है—जांच के नाम पर तब तक केवल कागजी औपचारिकताएं की जाएं और समय काटा जाए, जब तक कि कर्मचारी शान से रिटायर न हो जाएं! एक बार कर्मचारी सेवानिवृत्त हो गया, तो विभाग यह कहकर पल्ला झाड़ लेगा कि “अब तो वह सेवा में ही नहीं है, जांच कैसे करें?”

कमेटी का गठन सिर्फ एक ‘सेफ एग्जिट रूट’
शिकायत पर CMHO द्वारा जारी पत्र (क्रमांक/शिकायत शाखा/2026/2030) के तहत तीन सदस्यीय जांच टीम का गठन तो कर दिया गया, लेकिन इस टीम को रिपोर्ट सौंपने की कोई समय-सीमा नहीं दी गई है।
बिना किसी समय-सीमा के बनाई गई यह कमेटी असल में लेखापाल को ‘सेफ एग्जिट’ देने का माध्यम नजर आ रही है। जब वित्तीय नियमों के उल्लंघन के सीधे दस्तावेजी प्रमाण सामने मौजूद हैं, तो फिर महीनों तक चलने वाली जांच का क्या औचित्य है? तत्काल प्रभाव से निलंबन की कार्रवाई क्यों नहीं की गई?

सुशासन तिहार’ के मंच पर दावों की उड़ रही धज्जियां!
एक तरफ प्रदेश में ‘सुशासन तिहार’ का ढिंढोरा पीटा जा रहा है, जहाँ दावा है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। लेकिन राजनांदगांव जिला प्रशासन की नाक के नीचे चल रहा यह खेल सुशासन के दावों की धज्जियां उड़ा रहा है। गरीबों के हक का पैसा डकारने की साजिश रचने वाले एक कर्मचारी को सिर्फ इसलिए जीवनभर की कमाई (पेंशन-फंड) के साथ बेदाग विदा होने की तैयारी कराई जा रही है क्योंकि सिस्टम में बैठे उसके आकाओं को अपना हिस्सा डूबने का डर है।

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