एक्स रिपोर्टर न्यूज़ । राजनांदगांव
राजनांदगांव के मोहरा शराब बॉटलिंग कांड को लेकर आबकारी विभाग का अड़ियल और संवेदनहीन रवैया अब जनता के सब्र का बांध तोड़ रहा है। पुलिस की छापेमारी में हजारों फर्जी स्टीकर, ढक्कन और दूसरे राज्य की अवैध शराब जब्त हुए हफ़्तों बीत चुके हैं, लेकिन जिले के आबकारी अधिकारियों का बाल भी बांका नहीं हुआ है। विभाग की इस ‘रहस्यमयी’ और लंबी चुप्पी ने अब आम जनता के बीच आक्रोश की चिंगारी भड़का दी है। लोग अब सोशल मीडिया से लेकर चौक-चौराहों तक खुलेआम पूछ रहे हैं कि आख़िर राजनांदगांव के आबकारी अमले पर आकाओं की ऐसी कौन सी मेहरबानी है, जो इतनी बड़ी चूक के बाद भी उनकी कुर्सी टस से मस नहीं हो रही है?
कागज़ी घोड़े दौड़ाने में माहिर, ज़मीनी कार्रवाई पर ‘ज़ीरो‘
जब भानुप्रतापपुर में ऐसा ही अवैध नेटवर्क मिला था, तो शासन ने बिना एक पल गंवाए त्वरित सस्पेंशन का आदेश जारी कर अपनी पीठ थपथपाई थी। लेकिन राजनांदगांव के मामले में जांच के नाम पर सिर्फ़ कागज़ी घोड़े दौड़ाए जा रहे हैं। सूत्रों की मानें तो विभाग के भीतर इस मामले को ठंडे बस्ते में डालने और फ़ाइलों को दबाने की पुरज़ोर कोशिश की जा रही है। जनता में यह चर्चा आम है कि आबकारी विभाग का खुफिया तंत्र सिर्फ वैध दुकानों से ‘कलेक्शन’ करने में ही सक्रिय रहता है, जबकि ग्रामीण इलाकों के खेतों और बोर घरों में चल रहे माफियाओं के सिंडिकेट से जानबूझकर नजरें फेर ली जाती हैं।
क्या किसी बड़ी त्रासदी के बाद जागेगा सोया हुआ तंत्र?
मोहरा गांव के उस खेत में चल रहा गोरखधंधा सीधे तौर पर इंसानी जिंदगियों से खिलवाड़ था। वहां ब्रांडेड शराब की आड़ में मिलावटी ज़हर परोसने का पूरा ताना-बाना बुना जा चुका था। राजनांदगांव की जनता आज डरी हुई है क्योंकि इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि जिले के किसी अन्य कोने में ऐसी ही कोई और अवैध यूनिट नहीं चल रही होगी। जब विभाग के अफ़सरों को यह पता है कि इतनी बड़ी विफलता के बाद भी उनका निलंबन नहीं होगा, तो उनकी लापरवाही और अधिक निरंकुश हो जाती है। नागरिक मंचों का कहना है कि क्या शासन राजनांदगांव में किसी बड़ी शराब त्रासदी का इंतजार कर रहा है, जिसके बाद ही कोई दंडात्मक कदम उठाया जाएगा?
तत्काल प्रभाव से निलंबन की हो रही मांग
राजनांदगांव की जनता द्वारा मांग की जा रही है कि:
राजनांदगांव के संबंधित आबकारी निरीक्षक और सहायक अधिकारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए।
इस बात की उच्च-स्तरीय जांच हो कि इतने हफ़्तों तक आबकारी अमला इस पूरे सिंडिकेट से अनजान कैसे रहा?
अगर जांच में स्थानीय स्टाफ की मिलीभगत सामने आती है, तो उन पर आपराधिक मुक़दमा दर्ज हो।
शासन को यह समझना होगा कि राजनांदगांव की जनता को भानुप्रतापपुर से अलग नहीं समझा जा सकता। यदि जल्द ही लापरवाह कुर्सियों पर गाज नहीं गिरी, तो विभाग के खिलाफ यह आक्रोश और बढ़ जाएगा।
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