मनरेगा कार्यों में अनियमितताओं की जांच पर उठे सवाल; उच्चाधिकारी के बजाय निचले स्तर के अधिकारियों को जांच सौंपे जाने से लीपापोती की आशंका गहरी
दो महीने की लंबी चुप्पी, आनन-फानन में नोटिस
कवर्धा XReporter News।। जिले के जनपद पंचायत सहसपुर लोहारा अंतर्गत ग्राम पंचायत दैहानडीह में मनरेगा (महात्मा गांधी नरेगा) / vb जी राम जी तहत हुए रिटेनिंग वॉल निर्माण कार्यों में लाखों रुपये की वित्तीय और तकनीकी अनियमितताओं का मामला गर्माता जा रहा है। शिकायतकर्ता द्वारा इस मामले में उच्च स्तरीय और स्वतंत्र जांच की मांग की गई थी, लेकिन इसके बावजूद जनपद पंचायत द्वारा निम्न स्तर के अधिकारियों को जांच टीम में शामिल किए जाने से अब प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। क्या यह पूरी प्रक्रिया मामले में लीपापोती करने की कोई सोची-समझी कोशिश तो नहीं है? यह सवाल अब क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है।
*क्या हैं मुख्य शिकायतें और अनियमितताएं?*
दस्तावेजों के मुताबिक, ग्राम पंचायत दैहानडीह में (करनाला दैहानडीह से सहसपुर मार्ग पर) रिटेनिंग वॉल निर्माण के तीन अलग-अलग भागों (भाग-01, 02 एवं 03) में बड़े पैमाने पर धांधली सामने आई है:
कार्य का अवैध विभाजन: लगभग 51.17 लाख रुपये लागत के एक ही कार्य को कृत्रिम रूप से तीन भागों में विभाजित कर स्वीकृत कराया गया, ताकि नियमों की आड़ ली जा सके।
प्राक्कलन में हेराफेरी: तकनीकी मार्गदर्शन के अनुसार जहाँ PCC (1:3:6) का प्रावधान होना चाहिए था, वहीं RCC (1:2:4) के आधार पर प्राक्कलन तैयार कर कार्य कराया गया, जिससे लागत अनावश्यक रूप से बढ़ी और लगभग 7 से 8 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता हुई।
फर्जी टेस्ट रिपोर्ट और माप पुस्तिका (MB) में विरोधाभास: टेस्ट रिपोर्ट में दर्ज कास्टिंग दिनांक और माप पुस्तिका में दर्ज मिट्टी खुदाई की तिथियों में भारी विरोधाभास पाया गया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि निर्माण कार्य प्रारंभ होने से पूर्व ही टेस्ट रिपोर्ट तैयार कर ली गई थी, जिसके आधार पर मूल्यांकन और भुगतान कर दिया गया।
उच्च स्तरीय जांच की मांग को दरकिनार करने का आरोप
शिकायतकर्ता ने पूर्व में मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत कबीरधाम को आवेदन देकर यह स्पष्ट मांग की थी कि मामले की निष्पक्ष जांच हेतु ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (RES) के अनुभागीय अधिकारी से वरिष्ठ अधिकारियों या स्वतंत्र तकनीकी विशेषज्ञों को शामिल किया जाए। साथ ही यह भी मांग की गई थी कि जिन कर्मचारियों या अधिकारियों द्वारा पूर्व में कार्य का मूल्यांकन, सत्यापन और भुगतान किया गया है, उन्हें जांच टीम से पूरी तरह दूर रखा जाए ताकि जांच प्रभावित न हो।
लेकिन इन तमाम तर्कों को दरकिनार करते हुए, जनपद पंचायत सहसपुर लोहारा द्वारा जारी आदेश में सहायक विकास विस्तार अधिकारी (ADEO) चंद्रप्रकाश पाली और तकनीकी सहायक लक्ष्मी नारायण वैष्णव को जांच की जिम्मेदारी सौंप दी गई।
*अंधेरे में नोटिस और जल्दबाजी पर उठ रहे गंभीर सवाल*
जिला पंचायत में शिकायत किए हुए लगभग 2 माह बीत जाने के उपरांत अब जाकर जांच टीम गठित की गई है जिसे देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि प्रशासनिक अमला इस पूरे मामले को दबाने में लगा हुआ है। प्रशासनिक कार्यप्रणाली की सुचिता पर तब और बड़े सवाल खड़े हो गए, जब संबंधित जांच अधिकारी के द्वारा शिकायतकर्ता को 23 अक्टूबर को व्हाट्सएप के माध्यम से शाम के वक्त सूचना पत्र भेजा गया, जिसमें लिखा गया कि जांच आगामी 26 अक्टूबर (सोमवार) को निर्धारित है। इतनी जल्दबाजी में और इस तरह से आनन-फानन में जांच रखना कहीं न कहीं मामले में लीपापोती करने की ओर साफ इशारा करती है।
*जिला पंचायत में फिर होगा आवेदन, जांच निरस्त करने की मांग*
इस पूरी प्रक्रिया से असंतुष्ट होकर अब शिकायतकर्ता द्वारा जिला पंचायत में पुनः पत्र जारी कर यह निवेदन किया जाएगा कि इस मामले की जांच किसी उच्च स्तर के अधिकारी से कराई जाए तथा 26 अक्टूबर को रखी गई इस संदेहास्पद जांच को तत्काल निरस्त किया जाए, ताकि मनरेगा / vb जीरामजी कार्यों में हुई भारी वित्तीय व तकनीकी अनियमितता की असल गड़बड़ी खुलकर सामने आ सके।
*लीपापोती की आशंका क्यों?*
जानकारों और स्थानीय लोगों का कहना है कि जब शुरुआती स्तर पर ही तकनीकी मूल्यांकन और दस्तावेजों में गंभीर गड़बड़ियां पाई गई हैं, तो ऐसे में उन्हीं के समकक्ष या निचले स्तर के मैदानी अमले को जांच सौंपना निष्पक्षता के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। जिस अधिकारी या कर्मचारी की कार्यप्रणाली या निगरानी पर सवाल उठ रहे हों, यदि जांच का जिम्मा उसी स्तर के लोगों को दे दिया जाए, तो क्या दोषों पर पर्दा डालने (लीपापोती करने) की कोशिश को बल नहीं मिलेगा?
अब देखना यह होगा कि क्या जिला प्रशासन इस मामले का संज्ञान लेते हुए एक स्वतंत्र और उच्च स्तरीय दल का गठन करेगा, या फिर दैहानडीह मनरेगा/ vb जीरामजी घोटाले की फाइल कागजी खानापूर्ति तक ही सीमित रह जाएगी।


