IMG-20241026-WA0010
IMG-20241026-WA0010
previous arrow
next arrow
एक्स रिपोर्टर न्यूज़ । राजनांदगांव
छत्तीसगढ़ आबकारी विभाग के ट्रांसफर आदेश को लेकर राजनांदगांव कार्यालय में चल रहा दोहरा मापदंड अब खुलकर सामने आ गया है। मंत्रालय के एक ही आदेश (16/09/2026) के तहत राजनांदगांव से दो कर्मचारियों का तबादला हुआ था। इनमें से एक को नियमों की दुहाई देकर अवकाश के बावजूद तत्काल कार्यमुक्त (रिलीव) कर दिया गया, जबकि मुख्य लिपिक रामसिंह पाटिल को बचाने के लिए नियमों को ही ताक पर रख दिया गया है। आबकारी अधिकारियों का यह पक्षपातपूर्ण रवैया अब विभाग के भीतर ही बड़े विवाद का कारण बन चुका है।
एक ही आदेश, दो अलग कानून: एक के लिए सख्ती, ‘पाटिल’ पर नर्मी
सरकारी आदेश की कॉपी के मुताबिक, राजनांदगांव कार्यालय से दो बड़े नाम ट्रांसफर लिस्ट में थे:
(सहायक ग्रेड-2): सरल क्रमांक 3 पर दर्ज कर्मचारी का तबादला प्रशासनिक आधार पर जिला कोण्डागांव किया गया है। जानकारी के मुताबिक, कर्मचारी अवकाश (लीव) पर चल रहे थे। इसके बावजूद, विभाग ने तत्परता दिखाते हुए उन्हें तत्काल रिलीव कर दिया।
रामसिंह पाटिल (मुख्य लिपिक): सरल क्रमांक 1 पर दर्ज पाटिल का तबादला जिला बलरामपुर-रामानुजगंज किया गया है। वे पूरी तरह ड्यूटी पर मौजूद हैं, लेकिन उन्हें रिलीव करने के नाम पर अधिकारी सांप सूंघने जैसा व्यवहार कर रहे हैं।

सिविल सेवा आचरण और ट्रांसफर नियमों की उड़ रही धज्जियां
प्रशासनिक नियमों और ‘छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम’ के अनुसार, जब शासन किसी आदेश में ‘तत्काल प्रभाव से एकपक्षीय भारमुक्त’ करने का निर्देश देता है, तो वह आदेश कार्यालय के हर कर्मचारी पर समान रूप से लागू होता है।

भेदभाव का कोई प्रावधान नहीं: प्रशासनिक व्यवस्था में एक ही आदेश के तहत दो कर्मचारियों के लिए अलग-अलग मापदंड नहीं अपनाए जा सकते। पाटिल को रोकना और दूसरे कर्मचारी को छुट्टी में भी रिलीव करना यह साफ करता है कि राजनांदगांव आबकारी विभाग में ‘नियमों का राज’ नहीं, बल्कि ‘अधिकारियों की पसंद-नापसंद’ का राज चल रहा है।

आबकारी अधिकारियों की बोलती बंद, उठ रहे हैं गंभीर सवाल
इस नए खुलासे के बाद जब आबकारी अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने फिर से चुप्पी साध ली। पाटिल को रिलीव न करने के पीछे अब अधिकारियों के पास कोई तकनीकी या कानूनी बहाना भी नहीं बचा है।

जनता और महकमे में उठ रहे तीखे सवाल:
आबकारी विभाग के साहब यह बताएं कि जो नियम छुट्टी पर चल रहे कर्मचारी पर लागू हुआ, वह कार्यालय में मौजूद रामसिंह पाटिल पर क्यों लागू नहीं हो रहा?
मुख्य लिपिक पाटिल के पास राजनांदगांव कार्यालय का ऐसा कौन सा ‘राज’ या वित्तीय लेन-देन का जिम्मा है, जिसके बिना आबकारी अधिकारियों का काम ठप होने का डर है?
क्या आबकारी विभाग के आला अधिकारी इस खुले पक्षपात और शासकीय आदेश की अवहेलना पर राजनांदगांव के आबकारी अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करेंगे?
तबादला आदेश जारी हुए दो हफ्ते होने को हैं। एकतरफा कार्रवाई और अधिकारियों का यह दोहरा चेहरा अब मंत्रालय तक पहुंच चुका है। देखना होगा कि इस ‘रसूखदार’ मुख्य लिपिक की कुर्सी कब हिलती है।
*******
error: Content is protected !!