एक्स रिपोर्टर न्यूज़ । राजनांदगांव
नवजात की सौदेबाजी के मामले में नित नए खुलासे हो रहे हैं। पुलिस ने दावा किया कि दुष्कर्म ग्रामीण क्षेत्र में हुई इसलिए मामले की कार्रवाई ग्रामीण पुलिस द्वारा की गई। जबकि हकीकत में दिसंबर 2025 में ही शहरी पुलिस स्टेशन में दो बार मामले की शिकायत हुई, जिसपर जांच के नाम पर 15 दिनों तक तीनों निजी अस्पताल के डॉक्टरों और वहाँ के स्टाफ का बयान लिया जाता रहा। इसकी पुष्टि खुद पुलिस अधिकारी कर रहे है। फिर अचानक तीनों अस्पताल को बचाने के लिए कार्रवाई पूरी पलट दी गई। आरोप का ठिकरा चयनित गिनेचुने लोगों के सिर पर फोड़ दिया गया।
शहरी पुलिस के अनुसार दिसंबर 2025 में दो बार मामले की शिकायत हुई। जिसमें से एक शिकायत अज्ञात व्यक्ति ने की थी जबकि दूसरी शिकायत 18 दिसंबर 2025 को उस निजी अस्पताल के प्रबंधनीय डॉक्टर द्वारा दी गई जहां से जन्म प्रमाण पत्र बनाने के लिए आवेदन किया गया था। ज्ञात हो कि पिछले समाचार में हमने दस्तावेजी सबूत के आधार पर बताया था कि जिस डॉक्टर के नाम से जन्म प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया गया था उन्होंने दिसंबर में पुलिस में लिखित पत्र देकर मार्च 2025 से दिसंबर 2025 तक प्रसव नहीं कराने की बात कही थी। मतलब एक ही नाम के निजी अस्पताल से दो अलग-अलग डॉक्टर द्वारा पत्र पुलिस के पास भेजा गया, अब इसमें से कौन सा पत्र शिकायत के लिए था और कौन सा बचाव या फिर कार्रवाई को पलटने लिए था। यह जांच का विषय है।
अब सवाल यह कि कोई भी कर्मचारी बैगर प्रबंधन के इजाजत के आवेदन में नाम और मुहर कैसे लगा सकता है। रहा सवाल घटनास्थल का तो ठीक है दुष्कर्म की कार्रवाई ग्रामीण थाने में की गई, लेकिन सोनोग्राफी प्रसव और नवजात की सौदेबाजी की घटना शहरी क्षेत्र में हुई है तो इस मामले की कार्रवाई शहरी थाने में ही होनी चाहिए थी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। यही वजह है कि इस मामले की कार्यवाही को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। इस मामले को लेकर दोबारा जांच करने की जरूरत है अस्पतालों के सीसीटीवी फुटेज, संलिप्त लोगों के कॉल डिटेल्स निकाले जाए तो चौकाने वाले खुलासे होंगे और सच खुद ब खुद बाहर आ जाएगा।
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