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✍🏻 लाला कर्णकान्त श्रीवास्तव

राजनांदगांव जिला मुख्यालय से लगभग 65 किलोमीटर दूर अंबागढ़ चौकी तहसील में स्थित है यह अद्भुत पर्यटन स्थल

एक्स रिपोर्टर न्यूज़ । राजनांदगांव

खाली पैर (बैगर जूता चप्पल) और हाँफती सांसों के साथ दुर्गम चढ़ाई जो आगे जाकर रोमांचकारी सफर और रहस्यमई गुफा के द्वार पर खुलती है। यही है आमागढ़ गुफा। राजनांदगांव जिला मुख्यालय से लगभग 65 किलोमीटर दूर अंबागढ़ चौकी तहसील में स्थित यह पर्यटन स्थल प्राकृतिक चट्टानी गलियारे, विशाल ग्रेनाइट की दीवारें और हवा में लटके से प्रतीत होते बड़े-बड़े पत्थरों का आश्चर्यचकित आकर्षण अपने अंदर समेटे हुए हैं। इनदिनों रोमांचकारी पर्वतारोहण का आनंद लेने काफी संख्या में पर्यटक आमागढ़ गुफा पहुंच रहे है। घने जंगलों के बीच प्राकृतिक रोमांच जो किसी का भी मन मोह ले।

लोकल गाइड के बिना जाना असंभव

आमागढ़ गुफा अपने आप में ही काफी रहस्यमय है। गुफा के अंदर चट्टानी गलियारों की भूल भुलैया है। यहां भटकने से बचने के लिए लोकल यानी आसपास के गांव के गाइड या व्यक्ति का मार्गदर्शन लेना जरूरी हो जाता है।

देवी-देवताओं का वास, इसलिए खाली पर होती है पहाड़ की चढ़ाई

लोकल गाइड एवं स्थानीय गांव दुर्रेटोला निवासी प्रेमलाल कुमरे ने बताया कि स्थानी मान्यता अनुसार पहाड़ के अंदर देवी देवताओं का वास है इसलिए पहाड़ की चढ़ाई नंगे पैर करने के लिए कहा जाता है और खाली पैर चढ़ाई से चट्टानों से फिसलने का डर भी नहीं रहता।

अंदर रहता है घुप अंधेरा, जाने के लिए टॉर्च जरूरी

पर्यटक मोहन सिन्हा, नरेश सारथी और चेतन यादव ने बताया कि गुफा के अंदर काफी अंधेरा रहता है इसलिए अंदर टॉर्च लेकर जाना जरूरी है। कहीं कहीं पर चट्टानी दरारों से हल्की रोशनी आती है लेकिन वह काफी नहीं।

दुर्गम क्षेत्र इसलिए दिन में की जा सकती है ट्रेकिंग

आमागढ़ गुफा दुर्गम क्षेत्र में है इसलिए यहां दिन में ही ट्रेकिंग की जा सकती है। दिन की रोशनी के बगैर पहाड़ पर चढ़ाई खतरनाक साबित हो सकती है क्योंकि यहां पहाड़ पर चढ़ने के लिए कोई मानव निर्मित सीढ़ी नहीं है। साथ ही शाम होने पर जंगली जानवरों का खतरा बढ़ जाता है।

आक्रमण से बचने सुरक्षा के तौर पर होता था उपयोग

शासकीय दिग्विजय कॉलेज के इतिहास संकाय के प्रोफेसर डॉ. शैलेंद्र सिंह ने बताया कि स्थानीय मान्यताओं के अनुसार आमागढ़ गुफा का उपयोग आक्रमण के दौरान सुरक्षा के लिहाज से छिपने छिपाने के लिए किया जाता रहा होगा। पहाड़ के सिरे पर पहुंचने के बाद मोगरा जलाशय और आसपास के जंगलों का अद्भुत नजारा दिखता है। पर्यटन के लिहाज से इस क्षेत्र में डेवलपमेंट की जरूरत है।

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