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एक्स रिपोर्टर न्यूज़ । राजनांदगांव

राजनांदगांव में प्रशासनिक अधिकारियों ने मामले में लीपापोती की मिसाल पेश कर दी है। बीते महीने में हुए नाबालिग के प्रसव और नवजात शिशु की सौदेबाजी के मामले में एक तरफा कार्रवाई कर अधिकारियों ने नया रिकॉर्ड बना डाला है। जबकि नाबालिग का सोनोग्राफी, प्रसव और फिर नवजात की सौदेबाजी करने वाले शहर के तीन नामी निजी अस्पताल और उनके डॉक्टर एवं स्टाफ इस मामले में पूरी तरह संलिप्त है। ऐसे में पुलिस द्वारा की गई आधी अधूरी कार्रवाई को लेकर काफी सवाल खड़े हो चुके हैं।

भले ही मामले का खुलासा आज (11 जनवरी 2026) हुआ है। लेकिन यह मामला सितंबर 2025 यानी 3 महीने पुराना है। आखिर किस तरह निजी अस्पतालों ने इस अवैध कारनामे को अंजाम दिया? आईए जानते हैं…

कुछ साक्ष्य दस्तावेज और अंदरुनी सूत्रों के अनुसार सितंबर 2025 में डोंगरगढ़ क्षेत्र के एक नाबालिग लड़की को प्रसव पीड़ा के चलते गुपचुप तरीके से राजनांदगांव शहर लाया गया। यहां सर्वप्रथम एक निजी अस्पताल में नाबालिग का सोनोग्राफी किया गया। जिसमें पता चला कि वह 7 महीने के गर्भ से है। यहां पर बता दे कि किसी भी नाबालिग की तहकीकात किए बगैर सोनोग्राफी करना गैरकानूनी है। इसके बाद नाबालिग को दूसरे निजी अस्पताल में भर्ती किया गया। जहाँ प्रेमी और परिजनों से रुपए लेकर अवैध तरीके से नाबालिग का प्रसव कराया गया। 07 महीने के प्रीमेच्योर बेबी को विशेष नवजात शिशु देखभाल ईकाई (Special Newborn Care Unit) में भर्ती करने की जरूरत को देखते हुए शिशु को शहर के तीसरे निजी अस्पताल में शिफ्ट किया गया। वहाँ बच्चे को दो महीने तक रखा गया और फिर रुपए लेकर एक दंपति को शिशु बेच दिया गया। शिशु का सौदा करने से पूर्व बाकायदा जन्म प्रमाण पत्र से लेकर अन्य तरह के फर्जी सर्टिफिकेट बनाए गए। जबकि यह पूरा कृत्य कानूनी अपराध के दायरे में आता है। इसके बावजूद निजी अस्पताल और डॉक्टरों पर कार्रवाई नहीं किया जाना, कार्रवाई पर सवालिया निशान लगा रहा है।

रुपए बंटवारे को लेकर हुई अनबन, थाना पहुंची शिकायत

निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने पूरी तरह से मामला दबाए रखा था। लेकिन सौदेबाजी में मिले रुपए के बंटवारे को लेकर उनकी आपस में ही अनबन हो गई। ऐसे में एक परिजन ने शहरी थाने में जाकर मामले की शिकायत कर दी। शहरी थाना पुलिस ने मामले को लेकर शुरुआती कार्रवाई भी शुरू की, मामले में संलिप्त लोगों जिसमें डॉक्टर भी शामिल थे, सभी का बयान लिया गया। लेकिन कार्रवाई बीच में ही रोक दी गई। और मामले को घूमाने के लिए ग्रामीण इलाके की पुलिस को केस ट्रांसफर कर दिया गया। इस मामले में घिरे निजी अस्पताल और उनके डॉक्टरों एवं स्टॉफ को बचाने के लिए नाबालिग प्रेमी और नाबालिग लड़की के परिजनों पर दबाव बनाया गया और काफी रुपए पानी की तरह बहाने की भी जानकारी सामने आई है। अब देखना यह कि बाल संरक्षण ईकाई और बाल न्यायालय इस मामले में क्या कार्रवाई करती है।

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