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एक्स रिपोर्टर न्यूज़ । राजनांदगांव

जिस मामले को पुलिस अभी का बताकर वाहवाही लूट रही है। नवजात की अवैध कस्टडी का वह मामला महीनों पुराना है। इस मामले की पुष्टि हमारी पड़ताल में मिले दस्तावेजी सबूत से हो रही है। साफ पता चल रहा है कि जिस डॉक्टर के नाम और उनके निजी अस्पताल के मुहर पर आवेदन कर नवजात का नगर निगम से जन्म प्रमाण बनवाया गया। उस डॉक्टर ने एक महीने पहले यानी दिसम्बर के प्रथम सप्ताह में लिखित पत्र देकर पुलिस को सफाई दी थी कि उन्होंने (डॉक्टर) ने मार्च 2025 से दिसंबर 2025 तक कोई सिजेरियन या सामान्य प्रसव नहीं कराया है।

Investigative reporter@राजनांदगांव: शहरी थाना में हुई शिकायत, ग्रामीण इलाके की पुलिस ने की आधी अधूरी कार्रवाई, नाबालिग का सोनोग्राफी, प्रसव कराने और फिर नवजात का सौदा करने वाले तीन अस्पताल और उनके डॉक्टर, स्टॉफ पर जांच की आंच तक नहीं…

इसके बावजूद उनके अस्पताल से फर्जी बिल बनाकर नवजात का सौदा कर दिया गया। सीधे कहे तो पुलिस को मामले की जानकारी काफी पहले से थी लेकिन पुलिस अधिकारी मामला उजागर करने से बचते रहे। आखिर ऐसा क्यों…? सवाल अब भी सुलग रहा है। पुलिस इस मामले को जितना सीधा बता रही है दरअसल मामला उतना सीधा नहीं है। इस मामले में जिन तीन निजी अस्पताल और उनके डॉक्टरों ने गैरकानूनी कार्य को अंजाम दिया है, उन्हें बचाने की पुरजोर कोशिश और साजिश की जा रही है। खैर इस मामले में हमारी पड़ताल निरतंर जारी है।

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