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आज सिद्धपीठ श्री खेड़ापति हनुमान मंदिर में होगा ग्रंथी पूजन
27 वर्षों से जारी दुर्लभ संकट-निवारण अनुष्ठान, हजारों भक्त होंगे शामिल

कवर्धा। सिद्धपीठ श्री खेड़ापति हनुमान मंदिर में विगत 27 वर्षों से संकट निवारण हेतु विशाल ग्रंथी पूजन का आयोजन किया जा रहा है। पूरे प्रदेश में यह दुर्लभ अनुष्ठान केवल इसी मंदिर में होता है, जहां हजारों भक्त अपने संकटों से मुक्ति की कामना के साथ ग्रंथी पूजन करते हैं। देश-विदेश में रहने वाले श्रद्धालु भी यहां से पीला धागा बनवाकर स्वयं एवं परिवारजनों को धारण कराते हैं, जिससे जीवन की बाहरी बाधाएं दूर होने और हनुमान जी की विशेष कृपा प्राप्त होने की मान्यता है।

भविष्य पुराण के अनुसार व्यास जी द्वारा रचित यह व्रत अत्यंत दुर्लभ और गोपनीय माना गया है। अगहन शुक्ल त्रयोदशी के दिन नदी या सरोवर में स्नान कर हनुमान जी की विधि-विधान से पूजा की जाती है। पूजा के दौरान पीले धागे में “ऊं नमो भगवते वायु नन्दनाय नमः” मंत्र का जप करते हुए तेरह गांठें लगाई जाती हैं। इस ग्रंथी का पूजन कर हनुमान जी को अर्पित करने के बाद भक्त स्वयं इसे धारण करते हैं, जिससे सभी प्रकार की बाधाएं दूर होने और मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है।

मान्यताओं के अनुसार प्रभु श्रीराम ने लंका विजय से पूर्व ऋष्यमूक पर्वत पर वानरों के साथ इसी व्रत का पालन किया था, जिससे विजय प्राप्त हुई। पांडवों ने भी वनवास के समय यह व्रत किया था, जिसके प्रभाव से युधिष्ठिर को पुनः राज्य प्राप्त हुआ। कलियुग में हनुमान जी को राजा माना गया है। इस व्रत को जितनी श्रद्धा और विश्वास से किया जाता है, उतना ही फल मिलता है। अनास्था या अपमान करने पर विपरीत प्रभाव पड़ने की भी मान्यता है, इसलिए इसे केवल श्रद्धालुजन ही धारण करें। खेड़ापति हनुमान मंदिर में आज विशेष भोग के रूप में मालपुए अर्पित किए जाएंगे। मंदिर समिति द्वारा भोग लगाकर भक्तों को प्रसाद वितरण किया जाएगा।

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