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बेटी वैष्णवी के जन्मदिन पर शिक्षिका सुधा सकुनिया ने पेश की सेवा और संस्कार की मिसाल

110 विद्यार्थियों को टाई, बेल्ट एवं मोजे भेंट कर जन्मदिन को बनाया समाज सेवा का पर्व

कवर्धा।। आज के समय में जहाँ जन्मदिन समारोह अक्सर भव्य पार्टियों, आतिशबाजी और अनावश्यक खर्चों तक सीमित होकर रह जाते हैं, वहीं शासकीय प्राथमिक शाला महली की शिक्षिका सुधा सकुनिया (क्षत्रिय) ने अपनी चार वर्षीय पुत्री वैष्णवी के जन्मदिवस (31 जुलाई) को समाज सेवा और मानवीय संवेदनाओं से जोड़कर एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया।

अपनी पुत्री के चौथे जन्मदिन के अवसर पर उन्होंने विद्यालय के 110 छात्र-छात्राओं को स्कूल यूनिफॉर्म के आवश्यक सामान टाई, बेल्ट एवं मोजे वितरित किए। यह उपहार बच्चों के लिए केवल उपयोगी सामग्री ही नहीं, बल्कि उनके प्रति प्रेम, अपनत्व और शिक्षा के प्रति समर्पण का संदेश भी था।

कार्यक्रम की सबसे भावुक और आकर्षक झलक तब देखने को मिली जब नन्हीं वैष्णवी ने स्वयं अपने नन्हे हाथों से विद्यालय के बच्चों को सामग्री वितरित की। बच्चों ने भी बड़े उत्साह और मुस्कान के साथ उपहार ग्रहण किए तथा वैष्णवी को जन्मदिन की शुभकामनाएँ दीं। विद्यालय परिसर कुछ देर के लिए खुशी, आत्मीयता और अपनत्व के वातावरण से भर उठा।

इस अवसर पर वैष्णवी के पिता दीपक सकुनिया भी उपस्थित रहे और बच्चों के साथ इस विशेष दिन की खुशियाँ साझा कीं। उन्होंने कहा कि बच्चों को बचपन से ही सेवा, सहयोग और दूसरों के प्रति संवेदनशील बनने की सीख देना सबसे बड़ा संस्कार है।

कार्यक्रम में विद्यालय के प्रधान पाठक पवन पाठक ने इस सराहनीय पहल की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि यदि प्रत्येक परिवार अपने जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ अथवा अन्य पारिवारिक अवसरों पर समाज के जरूरतमंद लोगों के साथ खुशियाँ बाँटने का संकल्प ले, तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन स्वतः दिखाई देने लगेगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं होती, बल्कि ऐसे कार्य बच्चों को जीवनभर के लिए मानवता, सहयोग, दान और सामाजिक उत्तरदायित्व का वास्तविक पाठ पढ़ाते हैं।

विद्यालय के शिक्षक सुरेश देवांगन ने कहा कि यह आयोजन विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक है। इससे बच्चों के मन में दूसरों की सहायता करने और समाज के प्रति अपने दायित्व को समझने की भावना विकसित होती है। उन्होंने कहा कि शिक्षिका सुधा सकुनिया ने यह साबित किया है कि सच्चा उत्सव वही है, जिसमें अपनी खुशियाँ दूसरों के साथ साझा की जाएँ।

विद्यालय की शिक्षिका इन्द्राणी डोरे ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन शिक्षा को केवल ज्ञान तक सीमित नहीं रखते, बल्कि बच्चों के भीतर मानवीय मूल्यों का विकास करते हैं। उन्होंने नन्हीं वैष्णवी को जन्मदिन की शुभकामनाएँ देते हुए उसके उज्ज्वल भविष्य, उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु की कामना की।

सामग्री प्राप्त कर सभी विद्यार्थियों के चेहरे खुशी से खिल उठे। बच्चों ने शिक्षिका सुधा सकुनिया, दीपक सकुनिया तथा नन्हीं वैष्णवी का आभार व्यक्त करते हुए जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ दीं। विद्यालय परिवार ने भी इस अनूठी पहल को समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया।

यह आयोजन इस बात का जीवंत उदाहरण है कि जन्मदिन केवल केक काटने और उत्सव मनाने का अवसर नहीं, बल्कि समाज के जरूरतमंद लोगों के जीवन में खुशियाँ बाँटने का भी एक सुंदर माध्यम बन सकता है। यदि हर व्यक्ति अपने जीवन के विशेष अवसरों पर समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का संकल्प ले, तो निश्चित रूप से एक संवेदनशील, सहयोगी और संस्कारित समाज का निर्माण संभव है।

“खुशियाँ तब और बढ़ जाती हैं, जब उन्हें अपने तक सीमित न रखकर दूसरों के साथ बाँटा जाए।” यही संदेश शिक्षिका सुधा सकुनिया और नन्हीं वैष्णवी की यह प्रेरणादायक पहल पूरे समाज को दे रही है।

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