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एक्स रिपोर्टर न्यूज़ । राजनांदगांव

शासकीय जिला चिकित्सालय राजनांदगांव में हुए करीब 30 लाख रुपये के बहुचर्चित ‘फर्नीचर खरीदी फर्जीवाड़े’ को लेकर हर स्तर पर बैठी प्रशासनिक चुप्पी ने यह साफ कर दिया है कि यहाँ भ्रष्टाचार को सिर्फ संरक्षण ही नहीं, बल्कि ‘मूक सहमति’ भी दे दी गई है। मीडिया में हुए तीखे खुलासे और नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाकर दागी कर्मचारी को दोबारा मलाईदार प्रभार सौंपे जाने के बाद भी शासन-प्रशासन के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है। रसूखदारों के दबाव के आगे घुटने टेक चुका सिस्टम इस कदर पंगु हो चुका है कि नियम विरुद्ध जारी हुए ‘संशोधित आदेश’ पर न तो जिला प्रशासन ने कोई एक्शन लिया है और न ही स्वास्थ्य संचालनालय ने कोई सुध ली है।

Health reporter@राजनांदगांव: जिला अस्पताल में भ्रष्टाचार को खुला संरक्षण; फर्नीचर घोटाले के दागियों पर मेहरबान प्रशासन, विधानसभा में गूंजे मामले की जांच को ठंडे बस्ते में डाल फिर सौंप दी मलाईदार कुर्सियां…

जांच को डकार गया ‘भ्रष्ट सिंडिकेट’
इस पूरे मामले में सबसे शर्मनाक पहलू यह है कि नियम-कायदों की दुहाई देने वाले बड़े अधिकारी अब इस महाघोटाले पर पूरी तरह मुंह फेरे बैठे हैं। नियमों के मुताबिक, जिस कर्मचारी के खिलाफ वित्तीय गड़बड़ी की शिकायतें हों और जांच पेंडिंग हो, उसे तत्काल प्रभाव से दूर रखा जाना चाहिए था। लेकिन राजनांदगांव जिला अस्पताल में ‘उल्टी गंगा’ बह रही है। दागी कर्मचारी शान से अपनी उसी कुर्सी पर बैठकर फाइलों को ठिकाने लगा रहा है, जहाँ से घोटाले को अंजाम दिया गया था। प्रशासन की यह निष्क्रियता साफ इशारा करती है कि इस 30 लाख रुपये की मलाई में ऊपर से लेकर नीचे तक सबके हाथ सने हुए हैं, इसीलिए कोई भी अधिकारी इस फाइल को हाथ लगाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है।

तमाशा बनकर रह गई पांच सदस्यीय जांच समिति
जिला प्रशासन द्वारा जनता और मीडिया का गुस्सा शांत करने के लिए जिस पांच सदस्यीय जांच टीम का गठन किया गया था, वह आज पूरी तरह एक ‘मजाक’ साबित हो चुकी है। दो वरिष्ठ डॉक्टरों और फार्मासिस्ट वाली इस कमेटी ने महीनों बाद भी ‘भौतिक सत्यापन’ की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की है। हकीकत यह है कि यह समिति जांच करने के लिए नहीं, बल्कि घोटाले की फाइलों पर धूल जमाने और सबूतों को रफा-दफा करने के लिए बनाई गई थी। जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं और जांच करने वाले ही आरोपियों के मददगार हो जाएं, तो फिर निष्पक्ष कार्रवाई की उम्मीद किससे की जाए?

मौन प्रशासन दे रहा नए घोटालों को आमंत्रण
इस गंभीर मामले पर कलेक्ट्रेट से लेकर राजधानी तक पसरा यह सन्नाटा राजनांदगांव की जागरूक जनता के गाल पर एक करारा तमाचा है। जब इतने बड़े फर्जीवाड़े और नियम विरुद्ध आदेश पर भी कोई कार्रवाई नहीं होती, तो भ्रष्ट तत्वों के हौसले सातवें आसमान पर पहुंच जाते हैं। शासन-प्रशासन की यह चुप्पी चीख-चीख कर कह रही है कि राजनांदगांव जिला अस्पताल में नियम-कानूनों का नहीं, बल्कि ‘लूटतंत्र’ का राज चल रहा है। अब देखना यह है कि यह दबी हुई चिंगारी आने वाले दिनों में क्या रूप लेती है, या फिर यह घोटाला भी छत्तीसगढ़ के इतिहास में ‘फाइल बंद, मामला खत्म’ की तर्ज पर दफन हो जाएगा।

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