दिग्विजय महाविद्यालय में मनाया गया हिन्दी पत्रकारिता दिवस: राजनांदगांव जिले के पत्रकार आज देश, विदेश में कमा रहे है नाम : माननीय कुलपति डॉ. निगम
- पत्रकारिता का हमारे जीवन में महत्वपूर्ण योगदान : डॉ. टांडेकर
राजनांदगांव। शासकीय दिग्विजय स्वशासी स्नातकोत्तर महाविद्यालय, राजनांदगांव में प्राचार्य डॉ.के.एल.टांडेकर के मार्गदर्शन एवं पत्रकारिता विभागाध्यक्ष डॉ.बी.एन.जागृत के नेतृत्व में पत्रकारिता विभाग द्वारा ’हिन्दीं पत्रकरिता दिवस’ समारोह आयोजित की गई। समारोह के मुख्य अतिथि श्री शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, भिलाई के माननीय कुलपति प्रो. डॉ. एल.एस. निगम, विशिष्ट अतिथि पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. धनेश जोशी एवं सहायक प्राध्यापक डॉ. नरेश कुमार साहू,, उपस्थित थे।
मुख्य अतिथि समाननीय प्रो. डॉ. एल.एस. निगम ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि राजनांदगांव जिले के पत्रकार आज जिले में ही नहीं बल्कि प्रदेश – देश, विदेश में नाम कमा रहे है। पत्रकारिता का वर्चस्व आज भी जगह विद्यमान है। साथ ही उन्होंने हिंदी पत्रकारिता के इतिहास को बताया कि पूर्व, में पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के, बड़ा बाजार के पास, 37 अमर तल्ला लेन कोलूटोला से सन् 1826 में 30 मई को पहला ’हिंदी – अखबार’ निकाला गया था। इस अखबार का नाम ’उदन्त मार्तण्ड’ था। इसके संपादक पंडित जुगल किशोर शुक्ल रहे। उन्होंने कहा कि स्वाधीनता आंदोलन में हिंदी पत्रकारिता भारतीयों की सशक्त आवाज बनी। इस साप्ताहिक पत्रिका को डेढ़ साल के भीतर सन् 1827 के दिसंबर माह में बंद करना पडा। उन्होने आगे कहा कि निडरता-निष्पक्षता से पत्रकारों ने अपने महती भूमिका निभाई। प्रो. निगम ने कहा कि अच्छी स्थायी पत्रकारिता का आधार अंततः सिर्फ खबर की तात्कालिकता नहीं, उसके मर्म में छुपा विचार होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक अच्छा पत्रकार या तो किसी विचार को अपने रिपोर्ट या विश्लेषण के मार्फत प्रतिष्ठित करता है या फिर किसी स्वीकृत विचार के स्तर पर उसका सफलतापूर्वक तर्कसंगत विरोध, दोनों ही स्थितियों में वह लोकतंत्र की केन्द्रीयता को बहाल करता है।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. के. एल. टांडेकर ने कहा कि पत्रकार को पूरी निष्पक्षता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए, अच्छा पत्रकार सच को सामने लाने का कार्य करता है वह समाज का दपर्ण है। उन्होंने आगे कहा कि लोकतंत्र में मीडिया का महत्वपूर्ण योगदान है। पत्रकारिता के माध्यम से हमें प्रतिदिन घट रही घटनाओं के बारे में जानकारी मिलती है, उन्होंने विद्यार्थियों से प्रयोगधर्मी बनने का आह्वान किया व विद्यार्थियों को अखबार पढ़ने एवं अभी से समाचार पत्रों में लिखने के लिए भी प्रोत्साहित किया।

विशिष्ट अतिथि डॉ. धनेश जोशी ने अपने उद्बोधन में कहा कि पत्रकारों को एक साथ पांच तत्वों पर काम करना चाहिए, ताकि वे विकार,अप्रासंगिकता और बेकार काम का शिकार ना बनें. यह पांच तत्व हैं खबर को सूंघने की शक्ति, दुरुस्त मूल्यांकन, नैतिक साहस, विषय पर पकड़ और लिखने का कौशल. आपकी सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि आप अपने पूरे कार्य जीवनकाल में खुद को इन पांच तत्वों में निपुणता पाने के लिए किस हद तक स्वयं को धकेल सकते हैं। श्री जोशी ने विद्यार्थियो के प्रश्न का भी उत्तर दिया गया।

विशिष्ट अतिथि डॉ. नरेश कुमार साहू ने कहा कि अफवाह फैलाने के सौ तरीके हैं, यहां तक कि संपादन किसी कहानी के परिप्रेक्ष्य को बदल सकता है। अगर हम सटिक समाचार चाहते है तो हमारे लिए हमारी नैतिकता के अलावा और कोई विकल्प नहीं है।. उन्होंने कहा कि जहां भी व्यक्तिवाद है वहां अफवाह या निजी पक्षपात की गुंजाइश भी रहेगी ही इसलिए, पत्रकारों को निष्पक्षता सेे अपने मूल सिद्धांत पर अडिग रहना चाहिए।

पत्रकारिता विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. बी. नंदा जागृत ने कहा कि पत्रकार को अफवाहों से दूर रहकर मुद्दे की तह तक जाकर सही खबरों की खोजबीन करनी चाहिए जिससे समाज को सच्चाई की जानकारी हो सके साथ ही पत्रकारों को अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों को एक संबंध में विस्तृत जानकारी होनी चाहिए वर्तमान समय में पीत पत्रकारिता का वर्चस्व बहुत बढ गया है जिसके भिन्न – भिन्न स्वरुप दिखाई दे रहे। 
इस अवसर पर पत्रकारिता के विद्यार्थी अखिलेश एवं साथियों द्वारा पत्रकारिता के विषय जैसे अध्ययन – अध्यापन पर केन्द्रित एक डाक्यूमेंट्री फिल्म प्रदर्शित किया । जिसकी सभी अतिथियों ने सराहना करते हुए आगे भी इस तरह के कार्य करने के लिए प्रेरित किया। 
कार्यक्रम का संयोजन एवं संचालन पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. बी. नंदा जागृत द्वारा किया। आभार प्रदर्शन व्याख्याता अमितेश सोनकर ने किया। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में विभाग के व्याख्याता सुश्री रेशमी साहू, एवं लोकेश शर्मा विशिष्ट योगदान रहा साथ ही विद्यार्थीयों ने अपनी सहभागिता रही।

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