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एक्स रिपोर्टर न्यूज़ । राजनांदगांव

महिला की मौत मामले में जांच रिपोर्ट आने से पूर्व ही सिविल सर्जन पर कार्रवाई प्रशासनिक तत्परता कम वाहवाही बटोरने का कार्य अधिक लग रहा है। यदि प्रशासन स्वास्थ्य सेवाओं को पटरी पर लाने और दुरुस्त करने के लिए इतना ही सजक है तो फिर नवजात की सौदेबाजी जैसे गंभीर मसले में प्रशासन की ओर से किसी तरह का एक्शन क्यों नहीं लिया गया। नर्सिंग होम एक्ट को ठेंगा दिखाकर संचालित निजी अस्पतालों के कई गंभीर केसेस फाइलों में गुम हो गए हैं। तमाम शिकायतों के बावजूद कार्रवाई न होना स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है।

City reporter@राजनांदगांव: नवजात की सौदेबाजी का मामला; पुलिस का दावा- घटना दूसरे इलाके की, हकीकत- शहरी थाना में दो बार हुई शिकायत, 15 दिनों तक डॉक्टरों का लिया गया बयान, फिर निजी अस्पतालों को बचाने पलट दी कार्रवाई, सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल्स से होगा सच का खुलासा…

प्रशासन इतना ही सजग है तो फिर अभी तक निजी अस्पतालों के प्रकरणों पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई? क्या निजी अस्पतालों की पहुंच काफी ऊपर तक है या फिर इनके पास इतना धन है कि पीड़ितों की शिकायतों का निवारण से पहले ही दम घुट जा रहा है। नवजात की सौदेबाजी का मामला काफी गंभीर है। इस मामले में तीन निजी अस्पतालों की संलिप्तता है, इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस मामले में अभी तक जांच नहीं की गई। जिम्मेदारी होते हुए भी स्वास्थ्य विभाग के अफसर तमाशबीन बने रहे। स्वास्थ्य विभाग में निजी अस्पतालों की शिकायत टोकरी में पड़ी मिलती है, या फिर जांच का हवाला देकर महीनों तक फाइल दबा दी जाती है। या फिर जांच रिपोर्ट पलट दी जाती है। इन सभी मामलों को भी कलेक्टर को संज्ञान में लेना चाहिए और सीएमएचओ से सवाल करना चाहिए कि वे आखिर विभाग में बैठकर कर क्या रहे हैं? तभी तो आम जन को यकीन होगा कि वाकई जिला प्रशासन मामलों के निराकरण और दोषियों पर कार्रवाई को लेकर तत्परता दिखा रही है।

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