भारतीय मजदूर संघ द्वारा टूल डाउन आंदोलन का प्रथम दिवस, मांगें नहीं मानी गईं तो आने वाले दिनों में चक्का जाम की चेतावनी
पंडरिया। लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल सहकारी शक्कर कारखाना, पंडरिया में भारतीय मजदूर संघ द्वारा श्रमिकों की जायज मांगों को लेकर शुरू किए गए टूल डाउन आंदोलन के प्रथम दिवस श्रमिकों में प्रबंधन के रवैये को लेकर भारी आक्रोश देखने को मिला।
लगातार 7 माह से श्रमिकों का भुगतान लंबित है। पिछले हड़ताल अवधि का पैसा आज तक नहीं मिला है। इसके बावजूद श्रमिकों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय उनकी आवाज उठाने वाले संगठन के महामंत्री ललित चन्द्रवंशी की आईडी डिलीट कर दी गई।
संगठन का सवाल है—क्या श्रमिक अपने मेहनत के पैसे के लिए सवाल भी नहीं पूछ सकता? क्या अपने अधिकारों की बात करना नेतागिरी है?
ललित चन्द्रवंशी ने किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि सैकड़ों श्रमिकों के लंबित भुगतान और अधिकारों के लिए आवाज उठाई थी। इसी बात पर उनके खिलाफ कार्रवाई किया जाना श्रमिकों के सम्मान को चुनौती है।
भारतीय मजदूर संघ ने पिछले कई दिनों से प्रबंधन से बातचीत कर ललित चन्द्रवंशी की वापसी तथा अभी तक वापस नहीं लिए गए अन्य श्रमिकों की वापसी का निवेदन किया,लेकिन अब तक समाधान नहीं हुआ। इससे श्रमिकों का आक्रोश और बढ़ गया है।
अब सवाल केवल ललित चन्द्रवंशी का नहीं है!
आज यह सवाल हर उस श्रमिक का है जो मेहनत करता है,पसीना बहाता है और अपने परिवार का पालन-पोषण करता है।
7 माह का भुगतान कब मिलेगा?
पिछले हड़ताल का पैसा कब मिलेगा?
वापसी से वंचित श्रमिक कब काम पर लौटेंगे?
और श्रमिकों की आवाज उठाने वाले महामंत्री की आईडी क्यों डिलीट की गई?
भारतीय मजदूर संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि श्रमिकों की आवाज को दबाकर संगठन को कमजोर करने की कोशिश स्वीकार नहीं की जाएगी।
आज टूल डाउन आंदोलन के प्रथम दिवस श्रमिकों ने अपनी एकजुटता दिखाकर स्पष्ट संदेश दिया है कि डर और दबाव से श्रमिकों की आवाज बंद नहीं होगी।
यह लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष की नहीं, बल्कि प्रत्येक श्रमिक के सम्मान, अधिकार और भविष्य की लड़ाई है। भारतीय मजदूर संघ श्रमिकों के हितों से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगा।
आंदोलन आगे भी जारी रहेगा। यदि प्रबंधन द्वारा श्रमिकों की जायज मांगों का शीघ्र समाधान नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक एवं उग्र रूप दिया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर चक्का जाम जैसे बड़े आंदोलनात्मक कदम पर भी संगठन विचार करने के लिए मजबूर होगा।


