एक्स रिपोर्टर न्यूज़ । राजनांदगांव
छत्तीसगढ़ शासन के वाणिज्यिक कर (आबकारी) विभाग द्वारा जारी एक बड़े तबादला आदेश को राजनांदगांव आबकारी कार्यालय में ठेंगे पर रख दिया गया है। मंत्रालय द्वारा 16 सितंबर 2026 को जारी आदेश में साफ निर्देश था कि सभी स्थानांतरित कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से एकपक्षीय भारमुक्त किया जाए। इसके बावजूद 9 दिन बीत जाने के बाद भी आदेश पर अमल नहीं होना कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
शासन के आदेश को ठेंगा, आखिर किसका है संरक्षण?
आदेश की सरल क्रमांक 1 पर स्पष्ट रूप से दर्ज है कि मुख्य लिपिक रामसिंह पाटिल, जो वर्तमान में कार्यालय सहायक आयुक्त आबकारी, राजनांदगांव में पदस्थ हैं, उनका तबादला प्रशासनिक आधार पर कार्यालय जिला आबकारी अधिकारी, बलरामपुर-रामानुजगंज किया गया है।
तबादला सूची में सबसे पहला नाम होने और “प्रशासनिक” कारण होने के बावजूद पाटिल को अब तक रिलीव क्यों नहीं किया गया? आदेश में स्पष्ट तौर पर लिखा गया है कि इनका वेतन अब वर्तमान पदस्थापना (राजनांदगांव) से आहरित नहीं किया जाएगा, फिर भी वे अपनी पुरानी कुर्सी से चिपके हुए हैं।
सवालों से भाग रहे जिम्मेदार आबकारी अधिकारी
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला रवैया राजनांदगांव के आबकारी अधिकारियों का है। जब मीडिया और जागरूक नागरिकों द्वारा इस लेटलतीफी पर सवाल उठाए गए, तो जिम्मेदार आबकारी अधिकारी जवाब देने से बचते नजर आए।
अधिकारियों की यह रहस्यमयी चुप्पी और मीडिया के कैमरों से भागना साफ इशारा करता है कि पर्दे के पीछे कोई बड़ा प्रशासनिक खेल चल रहा है। क्या स्थानीय अधिकारी शासन के आदेश से भी बड़े हो चुके हैं?
उठ रहे हैं ये तीखे सवाल:
जब आदेश में ‘तत्काल प्रभाव’ और ‘एकपक्षीय भारमुक्त’ करने का स्पष्ट उल्लेख है, तो 9 दिनों तक फाइल क्यों दबाकर रखी गई?
मुख्य लिपिक रामसिंह पाटिल का राजनांदगांव मोह ऐसा क्या है कि वे ट्रांसफर के बाद भी कार्यमुक्त नहीं होना चाहते?
क्या आबकारी विभाग के उच्च अधिकारियों की मिलीभगत से शासन के नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं?
अब देखना यह होगा कि इस मनमानी और सरकारी आदेश की अवहेलना पर रायपुर में बैठे उच्च अधिकारी क्या एक्शन लेते हैं, या फिर राजनांदगांव आबकारी विभाग इसी तरह अपनी समानांतर सरकार चलाता रहेगा।
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