IMG-20241026-WA0010
IMG-20241026-WA0010
previous arrow
next arrow

एक्स रिपोर्टर न्यूज़ । राजनांदगांव

शासकीय जिला चिकित्सालय राजनांदगांव में वर्ष 2024-25 के दौरान हुए करीब 30 लाख रुपये के फर्नीचर खरीदी फर्जीवाड़े में प्रशासनिक संरक्षण और बेशर्मी का एक ऐसा सनसनीखेज सच सामने आया है, जिसने समूचे छत्तीसगढ़ के सरकारी महकमे की साख को बट्टा लगा दिया है। इस पूरे महाघोटाले की कड़ियां अस्पताल के जिस लेखापाल और साथी कर्मचारियों से जुड़ी हैं, उन्हें बचाने के लिए पूरा तंत्र पिछले 7 महीनों से एड़ी-चोटी का जोर लगाए बैठा है। इस मामले की लिखित और आधिकारिक शिकायत फरवरी 2026 में ही दर्ज करा दी गई थी, लेकिन आज 23 सितंबर 2026 तक, यानी पूरे 7 महीने बीत जाने के बाद भी संलिप्त अधिकारी, लेखापाल समेत अन्य कर्मचारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। कार्रवाई तो दूर, नियमों की बलि चढ़ाकर दागी चेहरों को इनामों से नवाजा जा रहा है।

Health reporter@राजनांदगांव: महा-घोटाले पर महा-मौन; अस्पताल का 30 लाख का फर्नीचर फर्जीवाड़ा और दागी का ‘प्रमोशन खेल’ उजागर, फिर भी तंत्र पूरी तरह लकवाग्रस्त, रक्षक ही बने भक्षकों के ढाल…

 

फरवरी 2026 की शिकायत पर क्यों सांप सूंघ गया जिला प्रशासन को?
जब फरवरी 2026 में शिकायतकर्ता ने बिना वैध ‘प्रशासकीय स्वीकृति’ के वित्तीय सीमाओं का उल्लंघन कर 30 लाख रुपये का बिल ठिकाने लगाने वाले अधिकारी, कर्मचारियों के खिलाफ दस्तावेजी सबूतों के साथ शिकायत की थी, तब अस्पताल प्रबंधन ने आनन-फानन में जिला प्रशासन की ओर पत्र बढ़ाकर जांच करवाने की अनुशंसा की। जिला प्रशासन ने जांच टीम बनाई। लेकिन इस कमेटी को केवल और केवल समय काटने का जरिया बनाया गया। 7 महीने से ‘भौतिक सत्यापन’ के नाम पर फाइल को दबाकर रखा गया है। साफ जाहिर है कि लेखापाल और साथी कर्मचारियों के पास अस्पताल के कई बड़े रसूखदारों के वित्तीय राज दफन हैं, इसीलिए इन किरदारों पर हाथ डालने की हिम्मत सिविल सर्जन से लेकर जिला प्रशासन का कोई अफसर नहीं जुटा पा रहा है।

दाग छुपाकर गोपनीय चरित्रावली (CR) से किया गया खिलवाड़
इस मामले का सबसे काला और नियम विरुद्ध अध्याय तब लिखा गया, जब फरवरी 2026 से जांच पेंडिंग होने के बावजूद इस लेखापाल की गोपनीय चरित्रावली के साथ प्रशासनिक स्तर पर बड़ा खेल खेला गया। छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम के तहत जिस कर्मचारी के खिलाफ वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत और जांच लंबित हो, उसकी पदोन्नति को ‘सीलबंद लिफाफे’ में डाल दिया जाता है। लेकिन लेखापाल के सारे वित्तीय पापों पर प्रशासनिक सफेदी पोतकर विभागीय पदोन्नति समिति के सामने इसकी साफ-सुथरी छवि पेश की गई और उसे लेखापाल से प्रमोट कर सीधे ‘मुख्य लिपिक’ की सबसे ताकतवर कुर्सी सौंप दी गई।

संलिप्त कर्मचारियों की मुट्ठी में ही सौंप दी गई अस्पताल की पूरी तिजोरी
लेखापाल रहते हुए जिस व्यक्ति ने क्रय नियमों की धज्जियां उड़ाकर बिलों को पास कराने के खेल को अंजाम दिया, उसे मुख्य लिपिक बना दिया गया और साथी कर्मचारियों को वापस उनकी कुर्सी पर बैठा दिया गया। आज ये दागी कर्मचारी अस्पताल के महत्वपूर्ण प्रभागों के सर्वेसर्वा बनकर बैठे है। यानी जिन कर्मचारियों के खिलाफ फरवरी 2026 से शिकायत पेंडिंग है, प्रशासन ने उन्हें ही पूरे अस्पताल की फाइलों और सबूतों का कस्टोडियन बना दिया है ताकि वे अपनी मर्जी से सारे प्रमाणों को रफा-दफा कर सके।

विधानसभा के आश्वासनों का क्रूर मर्डर, जनता में भारी आक्रोश
फरवरी 2026 की इस शिकायत की गूंज छत्तीसगढ़ विधानसभा के सदन तक में सुनाई दी थी, जहां बड़े-बड़े मंत्रियों ने कड़े एक्शन का ढिंढोरा पीटा था। लेकिन आज धरातल पर कार्रवाई के नाम पर ‘बड़ा शून्य’ है। जिला अस्पताल में गरीब जनता दवाइयों, बेड और स्ट्रेचर के लिए तड़प रही है, लेकिन समूचा सरकारी तंत्र पिछले 7 महीनों से सिर्फ और सिर्फ इन दागी कर्मचारियों की मलाईदार कुर्सी की रखवाली करने में व्यस्त है। शासन-प्रशासन का यह महा-मौन चीख-चीख कर कह रहा है कि राजनांदगांव जिला अस्पताल में कानून का नहीं, बल्कि ‘लूटतंत्र’ का राज चल रहा है।

*******

You missed

error: Content is protected !!