सकरी नदी के अस्तित्व पर मंडराया संकट: भू-माफियाओं का अवैध कब्जा, बेबस प्रशासन
कवर्धा : कभी कवर्धा शहर की आधी आबादी के जीवन का आधार रही जीवनदायिनी सकरी नदी आज अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। एक समय था जब मई और जून जैसे भीषण गर्मी के महीनों में भी सकरी नदी में पानी की सतत धारा बहती थी और शहर के हजारों लोग अपनी दैनिक जरूरतों के लिए इसी नदी के पानी पर निर्भर रहते थे। आज वही नदी अतिक्रमण और अवैध प्लाटिंग के कारण गंभीर संकट का सामना कर रही है। युवा कांग्रेस प्रदेश सचिव आकाश केशरवानी ने कलेक्टर, कबीरधाम के नाम सौंपे गए शिकायत पत्र में आरोप लगाया है कि सकरी नदी से लगे खसरा क्रमांक 190 की 0.6840 हेक्टेयर भूमि तथा खसरा क्रमांक 188/1 की 0.7850 हेक्टेयर भूमि पर लगभग 10 से 12 फीट तक मिट्टी डालकर अवैध रूप से प्लाटिंग की गई है। शिकायत में कहा गया है कि नदी के तटबंध और प्राकृतिक स्वरूप से छेड़छाड़ पर्यावरण के साथ-साथ भविष्य में बाढ़, जलभराव और भूजल स्तर पर भी गंभीर प्रभाव डाल सकती है। आरोप है कि इस पूरे मामले के बावजूद प्रशासन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहा है और जिम्मेदार अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं। जिला प्रशासन से अवैध प्लाटिंग की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने तथा सकरी नदी के प्राकृतिक स्वरूप और तटबंध की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
ग्रामीणों की शिकायत पर शासकीय भूमि की गई सुरक्षित, लेकिन अवैध प्लाटिंग पर कार्रवाई अब भी अधूरी
ग्राम सामनापुर स्थित बिजली कार्यालय के सामने खसरा क्रमांक 191 की शासकीय भूमि पर पहले मिट्टी डालकर अवैध प्लाटिंग के लिए मार्ग का निर्माण किया जा चुका था। इस संबंध में ग्रामीणों द्वारा लगातार शिकायत किए जाने के बाद प्रशासन ने संबंधित क्षेत्र में तार फेंसिंग कर भूमि को सामाजिक भवन निर्माण हेतु सुरक्षित कर दिया। हालांकि आसपास की अन्य शासकीय भूमि पर प्रीकास्ट बाउंड्री बनाकर की गई अवैध प्लाटिंग के खिलाफ अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। इससे प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं और पूरे क्षेत्र में अवैध प्लाटिंग हटाने तथा दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
सकरी नदी: शहर की जीवनदायिनी धारा आज अस्तित्व के संकट में
कवर्धा शहर की जीवनदायिनी मानी जाने वाली सकरी नदी आज गंभीर संकट का सामना कर रही है। कभी शहर की पहचान रही यह नदी अब अपने अस्तित्व को बचाने के लिए संघर्ष करती नजर आ रही है।सकरी नदी का उद्गम भोरमदेव के समीप करिया आया के जंगलों से होता है। वहां से राजानवागांव और अमलीडीह जैसे गांवों तक नदी का पानी स्वच्छ और निर्मल रूप में बहता है। लेकिन जैसे-जैसे नदी कवर्धा शहर की ओर बढ़ती है, उसकी स्थिति लगातार बिगड़ती जाती है और शहर पहुंचते-पहुंचते नदी लगभग दम तोड़ देती है।हालांकि, अतीत में नदी के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए महत्वपूर्ण प्रयास किए गए थे। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में तत्कालीन कलेक्टर रमेश शर्मा के नेतृत्व में जनसहयोग से शहर के भीतर बहने वाले नदी के हिस्से की जेसीबी मशीनों से खुदाई कराई गई। इस अभियान के दौरान नदी से बड़ी मात्रा में जमी गाद हटाई गई, जिससे जलधारण क्षमता बढ़ाने का प्रयास किया गया।
इसके साथ ही, सरोधा जलाशय को सकरी नदी से जोड़ने की पहल की गई, ताकि गर्मी के मौसम में भी नदी में पर्याप्त जल बना रहे। इस योजना का उद्देश्य भूजल स्तर को बनाए रखना, शहर के वातावरण में ठंडक बनाए रखना तथा नदी के प्राकृतिक स्वरूप को संरक्षित करना था। आज आवश्यकता है कि सकरी नदी के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए फिर से ठोस एवं दीर्घकालिक प्रयास किए जाएं, ताकि यह जीवनदायिनी नदी अपनी पुरानी पहचान और उपयोगिता को पुनः प्राप्त कर सके।
अवैध प्लाटिंग की शिकायत पर जांच रिपोर्ट आई सामने, कार्रवाई अब भी अधूरी
कबीरधाम जिले में अवैध प्लाटिंग और शासकीय भूमि पर अतिक्रमण को लेकर युवा कांग्रेस के प्रदेश सचिव आकाश केशरवानी द्वारा पूर्व में की गई शिकायतों की जांच रिपोर्ट सामने आ गई है। रिपोर्ट में कई स्थानों पर नालों और शासकीय भूमि पर अतिक्रमण तथा अवैध प्लाटिंग की पुष्टि हुई है, लेकिन अब तक पूर्ण कार्रवाई नहीं होने से सवाल उठ रहे हैं। तालपुर ग्राम के खसरा क्रमांक 78 में जांच के दौरान पाया गया कि पहले पानी के नीचे नाले की चौड़ाई लगभग 7 से 8 मीटर थी, जो वर्तमान में घटकर 2 से 3 मीटर रह गई है।इसी प्रकार खसरा क्रमांक 109 में लगभग 5 मीटर चौड़े नाले पर 2.5 मीटर चौड़ा एवं 9 मीटर लंबा पुल बनाकर अतिक्रमण किया गया है। वहीं पूर्व दिशा के दक्षिण भाग में पहले 7 से 8 मीटर चौड़ा नाला वर्तमान में 3 से 4 मीटर तक सीमित पाया गया।गुरुनाला सेतु (खसरा क्रमांक 1049) में भी अन्य खसरा धारकों द्वारा नाले की ओर सीमा बढ़ाकर अतिक्रमण किए जाने का उल्लेख जांच रिपोर्ट में किया गया है।इसके अलावा छिरहा ग्राम के खसरा क्रमांक 2 में गिट्टी-मुरुम डालकर कब्जा किए जाने की बात सामने आई है।वहीं घोटिया नाला (खसरा क्रमांक 137) में, जो घोटिया और छिरहा गांवों की प्राकृतिक सीमा निर्धारित करता है, नाले से लगे मुरुम डालकर रास्ता बनाया गया और उसके बाद अवैध प्लाटिंग किए जाने का भी उल्लेख जांच रिपोर्ट में किया गया है।जांच रिपोर्ट सामने आने के बावजूद संबंधित स्थानों पर पूर्ण कार्रवाई नहीं होने से प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।


