एक्स रिपोर्टर न्यूज़ । राजनांदगांव
छत्तीसगढ़ आबकारी विभाग में भ्रष्टाचार और ओवर रेटिंग के खिलाफ कार्रवाई को लेकर अब दोहरा मापदंड अपनाने के गंभीर आरोप लगने लगे हैं। नवा रायपुर मुख्यालय से जारी आबकारी आयुक्त के एक ताजा आदेश ने राजनांदगांव आबकारी विभाग के आला अधिकारियों की नीयत और निष्पक्षता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। आदेश के मुताबिक, जिला खैरागढ़-छुईखदान-गंडई के गंडई क्षेत्र में सिर्फ 10 रुपये की ओवर रेटिंग पाए जाने पर उड़नदस्ते की रिपोर्ट के बाद आबकारी उप निरीक्षक प्रभाकर सिरमौर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। उन पर ‘घोर लापरवाही, उदासीनता और शिथिल नियंत्रण’ का दोषी पाया गया। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि यही ‘सख्त कानून’ राजनांदगांव जिले के अधिकारियों पर लागू क्यों नहीं होता?
राजनांदगांव में ओवर रेटिंग का खुला खेल, फिर भी चुप्पी
राजनांदगांव जिले में शराब प्रेमियों से खुलेआम अधिक कीमत वसूलने यानी ओवर रेटिंग का खेल कोई नया नहीं है। यह पूरा सिंडिकेट अधिकारियों के संरक्षण में फल-फूल रहा है। बीते महीनों में विभागीय उड़नदस्ते (फ्लाइंग स्क्वाड) ने जिले की ‘घुमका’ और ‘रेवाडीह’ स्थित मदिरा दुकानों पर ताबड़तोड़ छापामार कार्रवाई की थी। इस कार्रवाई में भारी अनियमितताएं और तय कीमत से कहीं अधिक दामों पर शराब बेचे जाने की पुष्टि भी हुई थी। खैरागढ़ के मामले की तरह यहाँ भी उड़नदस्ते ने अपनी ब्लैक एंड व्हाइट रिपोर्ट सौंपी थी। बावजूद इसके, राजनांदगांव के जिम्मेदार अधिकारियों और प्रभारियों की कुर्सियां आज भी सुरक्षित हैं। उन पर निलंबन तो दूर, एक अदद कारण बताओ नोटिस तक जारी करने में विभाग के हाथ-पांव फूल रहे हैं।
10 रुपये पर निलंबन, तो लाखों के खेल पर मेहरबानी क्यों?
गंडई के मामले में शासन द्वारा निर्धारित दर 240 रुपये के स्थान पर 250 रुपये में शराब बेचते रंगे हाथों पकड़ा गया। महज 10 रुपये की इस ओवर रेटिंग को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम 3 के विपरीत मानकर अधिकारी को सीधे घर बैठा दिया गया। वहीं दूसरी ओर, राजनांदगांव जिले में प्रतिदिन लाखों रुपये की ओवर रेटिंग के जरिए जनता की जेब पर डाका डाला जा रहा है। उड़नदस्ते की छापामार कार्रवाई से यह साफ सिद्ध हो चुका है कि यहाँ के स्थानीय आबकारी अमले का नियंत्रण पूरी तरह खोखला और संदेहास्पद है। यदि गंडई के अधिकारी का नियंत्रण ‘शिथिल और दंडनीय’ था, तो राजनांदगांव के साहबों पर यह नियम लागू क्यों नहीं होता? क्या राजनांदगांव के अधिकारियों को भ्रष्टाचार की खुली छूट का कोई विशेष वीआईपी पास मिला हुआ है?
जनता में आक्रोश: सिंडिकेट और आबकारी की मिलीभगत उजागर
इस दोहरी कार्रवाई ने आबकारी विभाग के उस दावे की हवा निकाल दी है, जिसमें वे जीरो टॉलरेंस की बात करते हैं। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों की दुकानों में हर बोतल के पीछे 10 से 20 रुपये अतिरिक्त वसूलना यहाँ का अघोषित नियम बन चुका है। घुमका और रेवाडीह की कार्रवाई के बाद जनता को उम्मीद थी कि यहाँ भी बड़ी गाज गिरेगी, लेकिन नतीजा ‘ढाक के तीन पात’ रहा। आबकारी विभाग के इस पक्षपातपूर्ण रवैये से साफ है कि बड़ी मछलियों को बचाने के लिए केवल छोटे प्यादों की बलि दी जा रही है।
आबकारी आयुक्त के इस नए आदेश को ढाल बनाकर अब स्थानीय स्तर पर विरोध के स्वर तेज होने लगे हैं। मांग उठ रही है कि जब तक घुमका और रेवाडीह मामले के दोषी राजनांदगांव के अधिकारियों को भी गंडई की तर्ज पर तत्काल निलंबित नहीं किया जाता, तब तक यह साफ रहेगा कि विभाग खुद इस महाभ्रष्टाचार में पूरी तरह संलिप्त है।
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