भाटकुंडेरा में 19 लाख के चेकडेम निर्माण पर उठे सवाल, जल्दबाजी में बनाई सूचना पटल
मात्र 13 दिनों में बनाया चेकडेम, लगे अनियमितता के आरोप
सूचना पटल के कार्य प्रारंभ/पूर्णता दिनांक भी गलत

कवर्धा XReporter News।। जिले के स.लोहारा जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत – भाटकुंडेरा में चेकडेम निर्माण कार्य को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। यह निर्माण कार्य गजेंद्र के खेत के पास कठर्रा खार नाला में लगभग 19 लाख रुपये की लागत से कराया गया है।

ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में मनरेगा के नियमों की अनदेखी करते हुए मशीनों का उपयोग किया गया। साथ ही मजदूरी कार्य में भी केवल परिचित लोगों को ही प्राथमिकता दी गई, जिससे अन्य ग्रामीणों को रोजगार से वंचित होना पड़ा।

ग्रामीणों ने यह भी बताया कि चेकडेम निर्माण पूर्ण होने के बाद सूचना पटल लगाया गया, जो कि नियमों के विपरीत है। इससे यह संदेह उत्पन्न होता है कि तकनीकी अमला कार्यस्थल पर नियमित रूप से उपस्थित नहीं रहा और निर्माण कार्य की निगरानी सही तरीके से नहीं की गई।

सूचना पटल पर सवाल: आननफानन में बनाया बोर्ड
सूचना पटल में दर्शाई गई जानकारी पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। पटल में कार्य प्रारंभ और पूर्णता की तिथि गलत दर्ज की गई है—जहां वर्ष 2025 लिखा गया है, जबकि वास्तविक निर्माण जनवरी 2026 में किया गया। इतना ही नहीं, पटल के अनुसार चेकडेम का निर्माण मात्र 13 दिनों में पूरा कर लिया गया, जिससे कार्य की गुणवत्ता, कंक्रीट बेस की माप, क्योरिंग प्रक्रिया (पानी डालना) और तकनीकी जांच जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर सवाल उठ रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि इतने कम समय में इस प्रकार के निर्माण कार्य का पूर्ण होना उसकी मजबूती और टिकाऊपन पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
बताया जा रहा है कि स.लोहारा जनपद के कई ग्राम पंचायतों में मनरेगा के तहत मशीनों से कार्य कराए जाने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं, लेकिन संबंधित अधिकारियों द्वारा अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इससे यह आशंका भी जताई जा रही है कि कहीं न कहीं इन अनियमितताओं को दबाने की कोशिश की जा रही है।
ग्रामीणों द्वारा शिकायत और लगातार समाचार प्रकाशन के बावजूद कार्यवाही न होना प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े करता है।
अब देखना होगा कि इस खबर के प्रकाशन के बाद संबंधित कार्य एजेंसी और तकनीकी अमले पर जांच कर उचित कार्रवाई की जाती है या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाता है।


