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एक्स रिपोर्टर न्यूज़ । राजनांदगांव

तस्करी के जरिए मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र से पहुंच रही शराब ने छत्तीसगढ़ का आबकारी राजस्व घटा दिया है। सबसे ज्यादा प्रभाव राजनांदगांव जिले में पड़ा है। क्योंकि यह दोनों राज्य राजनांदगांव जिले की सीमा से लगे हुए हैं। चाक-चौबंद व्यवस्था के दावों के बीच बड़ी आसानी से पड़ोसी राज्य से शराब राजनांदगांव और फिर दुर्ग तक पहुंच रही है। डोंगरगढ़, बागनदी और साल्हेवारा जैसे सीमावर्ती क्षेत्र से शराब को छत्तीसगढ़ में एंट्री दिलाना वो भी बिना मिलीभगत के ये संभव नहीं है।

City reporter@राजनांदगांव: आबकारी विभाग में लंबे समय से जमे बाबू रामसिंह पाटिल को हटाने की मांग, जोगी युवा मोर्चा ने सौंपा ज्ञापन, शराब की ओवर रेटिंग, कमीशनबाजी और कोचियागिरी को संरक्षण देने का लगाया आरोप…

सूत्रों की माने तो तस्करो ने आबकारी और पुलिस महकमे के अधिकारी-कर्मचारियों से तगड़ी सेटिंग कर रखी है। सवाल यह है कि आखिर इस तरह के अवैध कार्य को संरक्षण देने वाला आबकारी विभाग का मास्टरमाइंड है कौन…? इधर लोकल दुकानों से कोचियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रतिबंध के बावजूद धर्मनगरी कहलाने वाले डोंगरगढ़ में खुलेआम शराब का बिकना पुलिस की कार्यप्रणाली को भी घेरे में ले चुका है। त्यौहार तो छोड़िए नवरात्रि जैसे पावन पर्व के दौरान भी डोंगरगढ़ में खुलेआम शराब बेचने और पिलाने का कारोबार चलता रहा। सूत्रों की माने तो शराब के अवैध कारोबारियों ने पुलिस से भी तगड़ी सेटिंग कर रखी है।

दिखावे के लिए की जाती है एक दो मामले में कार्रवाई

तस्करों के साथ पुलिस और आबकारी विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत की खबर फैले नहीं इसलिए महीने-दो महीने में एक दो मामलों में कार्रवाई का दिखावा कर दिया जाता है। गौरतलब है कि मध्यप्रदेश से छत्तीसगढ़ में शराब की तस्करी और उसमें आबकारी अधिकारियों व कर्मचारियों के संरक्षण की खबरें अक्सर सामने आती रही हैं। हाल के घटनाक्रमों में यह बात खुलकर सामने आई है।

शराब तस्कर और आबकारी अधिकारियों की मिलीभगत

जांच और रिपोर्टों के अनुसार, मध्यप्रदेश से शराब की बड़ी खेप छत्तीसगढ़ सीमावर्ती जिले में पहुंच रही है। सर्वप्रथम राजनांदगांव का नाम सामने आता है। जिसमें स्थानीय आबकारी विभाग के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत या उदासीनता के आरोप लगते रहे हैं।

आबकारी अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध

कई मामलों में यह आरोप लगे हैं कि आबकारी विभाग के संरक्षण के कारण अवैध कारोबार फलता-फूलता है और ग्रामीणों की शिकायतों के बावजूद गंभीरता नहीं दिखाई जाती।

त्योहार से पहले बड़े पैमाने पर होती है तस्करी

होली-दिवाली जैसे त्योहारों से पहले भी एमपी से छत्तीसगढ़ में शराब तस्करी की घटनाओं में तेजी देखी गई है, जहां पुलिस ने अवैध शराब जब्त की है। सूत्रों की माने तो त्यौहार में पुलिस कार्यवाही तो करती है लेकिन दिखावे के लिए। कार्रवाई में छोटे कोचियों को पकड़कर बड़े तस्करों के लिए रास्ता साफ कर दिया जाता है, यही वजह है कि त्योहार के समय गली मोहल्ले में शराब आसानी से मिल जाती है।

दस्तावेजों में हेराफेरी कर देते है तस्करी को अंजाम

सूत्रों की माने तो अवैध शराब के परिवहन के लिए अक्सर नकली परमिट या बिना बिल वाली शराब का उपयोग किया जाता है, जिसके तार कई बार मध्यप्रदेश के डिस्टिलरी से जुड़े होते हैं। कार्रवाई अक्सर छोटे मामलों में की जाती है जबकि बड़े तस्कर हमेशा रडार से बाहर रहते है।

इधर अवैध कारोबार के लिए कोचियों को सरकारी दुकानों से बल्क में मिल रही शराब

इधर अवैध कारोबार के लिए कोचियों को सरकारी दुकानों से थोक में शराब मिल रही है। इस बात की पुष्टि हम नहीं पुलिस की क्राइम डाटा कर रही है। बीते जनवरी माह में राजनांदगांव जिला पुलिस की ओर से जारी की गई प्रेस रिलीज में दावा किया गया था कि बीते तीन महीनों में पुलिस ने छापामार कार्रवाई कर भारी मात्रा में छत्तीसगढ़ में निर्मित देशी एवं विदेशी शराब जब्त की है। पुलिस के मुताबिक धारा 34(1), 34(2) आबकारी एक्ट के तहत 92 प्रकरणों में 95 आरोपियों से 522.40 बल्क लीटर देशी प्लेन शराब कीमती 2,34,860/- रुपये जब्त किया गया। इसी तरह धारा 34(1), 34(2) आबकारी एक्ट के तहत 30 प्रकरणों में 33 आरोपियों से
133.23 बल्क लीटर अंग्रेजी शराब कीमती 88,540/- रुपये जब्त किया जा चुका है। इसके साथ ही देशी/विदेशी शराब परिवहन में प्रयुक्त 39 दोपहिया वाहन, कीमती 15,65,000/- रुपये की जब्ती की कार्रवाई की जा चुकी है।

आबकारी विभाग दे रहा शराब के अवैध कारोबार को बढ़ावा

इससे साफ है कि किस तरह आबकारी विभाग ही शराब के अवैध कारोबार को बढ़ावा देने में लगा हुआ है। ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि शासकीय शराब दुकानों की मॉनिटरिंग का जिम्मा पूरी तरह आबकारी विभाग को ही दिया गया है। विभागीय अधिकारियों के जानकारी के बिना शराब की एक बोतल भी इधर-उधर नहीं हो सकती।

राजस्व बढ़ाने की आड़ में काला कारनामा

सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार आबकारी विभाग के अफसर शराब से राजस्व बढ़ाने की आड़ में अवैध कारोबार को पोषित कर रहें हैं। गिनती के दुकानों से तय लक्ष्य में राजस्व की प्राप्ति होना असंभव है, ऐसा कहकर कोचियागिरी को बढ़ावा दिया जा रहा है। भले ही अवैध कारोबार समाज के लिए नुकसान देह क्यों न हो। लेकिन अधिकारियों को फ़ायदे से मतलब है। दुकानों से कोचियों को 200 से 300 रुपए प्रति पेटी अतिरिक्त रुपए लेकर अवैध तरीके से शराब बेची जा रही है।

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