पण्डरिया शक्कर कारखाने में खुला खेल? भारतीय मजदूर संघ का फूटा गुस्सा, संघ का भ्रष्टाचार पर बड़ा हमला!
कबीरधाम। भारतीय मजदूर संघ शक्कर कारखाना पण्डरिया इकाई ने कारखाना प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए उद्योग, किसानों, मजदूरों और शासन के हितों को नुकसान पहुंचाने का मामला उठाया है। संघ का कहना है कि कारखाने में भारी अनियमितताएं, आर्थिक गड़बड़ियां और श्रमिकों के अधिकारों का खुला उल्लंघन किया जा रहा है।
🔴 मुख्य आरोप और अनियमितताएं:
1. नए श्रम कानून की अनदेखी
21 नवंबर 2025 से लागू नए श्रम कानून के तहत श्रमिकों की नौकरी सुरक्षा और नियुक्ति पत्र अनिवार्य है। बावजूद इसके 8-9 वर्षों से कार्यरत श्रमिकों को “पेड-ऑफ” के नाम पर हटाया जा रहा है।
2. सिविल कार्य में घोटाले की आशंका
सिविल कार्यों में हुए खर्च का भौतिक सत्यापन नहीं हुआ। किस एजेंसी ने कार्य किया और कितना भुगतान हुआ, यह स्पष्ट नहीं है।
3. शीरा (मोलासिस) बिक्री में 12 लाख का नुकसान?
तीन फर्मों ने निविदा में भाग लिया, जिनमें दो फर्म एक ही समूह की बताई जा रही हैं।
वर्धमान ट्रेडर – ₹13212 प्रति टन
शुभम ट्रेडर – ₹13213 प्रति टन
दोनों को 1000-1000 टन का आदेश जारी किया गया।
जबकि बालोद में बाजार दर ₹13900 प्रति टन बताई गई।
👉 2000 टन पर लगभग ₹12 लाख का नुकसान होने की आशंका।
4.मोलासिस की गुणवत्ता पर सवाल
सी-हैवी मोलासिस तैयार किया गया, लेकिन शुद्धता बी-हैवी के बराबर बताई जा रही है। जांच की मांग।
5. पी.पी. बैग खरीदी में गड़बड़ी
बाजार में ₹20 प्रति बैग उपलब्ध होने के बावजूद ₹10 अधिक दर पर खरीदी का आरोप।
6.चुना खरीदी में दोगुनी दर
₹14,000 प्रति टन पर खरीदी, जबकि उत्पादक ₹7,000 प्रति टन देने को तैयार था।
7. ई.टी.पी. संचालन में फर्जी ठेका?
ई.टी.पी. का टेंडर दिया गया, जबकि संचालन के लिए केवल 3 ऑपरेटर पर्याप्त थे।
पिछले तीन साल से पर्यावरण एनओसी तक नहीं।
8.डब्लू.टी.पी. संचालन में 4.5 लाख प्रतिमाह भुगतान
आर.वी.आर. के माध्यम से संचालन, जबकि कार्य कारखाने के श्रमिक ही कर रहे हैं।
9.शुगर बैग हैंडलिंग का 5.5 लाख प्रतिमाह ठेका
चेन्नई की एक कंपनी को टेंडर, जांच की मांग।
10.केमिकल खरीदी में मनमानी
2025-26 सत्र में एक ही फर्म को उच्च दर पर टेंडर। केमिस्ट को भी जानकारी नहीं कि रसायन कहां उपयोग हुआ। प्रभारी चीफ केमिस्ट विपिन सादव पर संपूर्ण नियंत्रण का आरोप।
11. फ्लो मीटर खराब, फिर भी उत्पादन गणना जारी
पूरे सत्र में फ्लो मीटर सही नहीं चला, अनुमान के आधार पर गणना की गई।
12.मोलासिस वजन निर्धारण में गड़बड़ी
फ्लो मीटर डेटा के आधार पर भार निर्धारण, वास्तविक वजन सत्यापन नहीं।
13. इंजीनियरिंग सामग्री 10 गुना अधिक दर पर खरीदी?
वाल्व सहित अन्य सामग्री बाजार दर से कई गुना अधिक दर पर खरीदी का मौखिक आरोप।
⚠️ बड़ी मांग:
भारतीय मजदूर संघ ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय, निष्पक्ष जांच की मांग की है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह करोड़ों के आर्थिक नुकसान और प्रशासनिक भ्रष्टाचार का मामला बन सकता है।


