राजनांदगांव। बीते दिनों अवैध प्लाटिंग मामले में कार्रवाई करने वाले जिला प्रशासन ने अब तक अवैध प्लाटिंग करने वाले लोगों के नाम का खुलासा नहीं किया है। इससे यह स्पष्ट है कि यह कार्रवाई भी मात्र दिखावे के लिए ही की गई थी, असल मुद्दा तो कुछ और है। नगर निगम एवं अन्य विभागों के कुछ कथित भ्रष्ट अधिकारियों-कर्मचारियों के संरक्षण में निगम सीमा क्षेत्र में अवैध प्लाटिंग करने वाले भूमि स्वामी एवं भू-माफिया के हौसले बुलंद हैं।
बीते दिनों जिन खसरों पर अवैध प्लाटिंग के नाम पर जेसीबी चलाया गया है, उन खसरों के भूमि स्वामियों और जिन लोगों के द्वारा इन जमीनों की खरीद-बिक्री का एग्रीमेंट या रजिस्ट्री आदि हुई है तो उन अवैध प्लाटिंग करने वाले समस्त भूमि स्वामियों का नाम और फोटो समाचार पत्रों में प्रकाशित करवाने को लेकर जिला प्रशासन ने चुप्पी साध रखी है। कायदे से अवैध प्लाटिंग करने वाले लोगों का नाम उजागर होना चाहिए, ताकि आम शहरी अवैध प्लाटिंग के मायाजाल में अपनी गाढ़ी कमाई लगाने से बचे और उनका भला हो। नामों का खुलासा होना जनहित और शासन हित में बहुत जरूरी है। यदि जिला प्रशासन अवैध प्लाटिंग मामलों में कार्रवाई करने को लेकर इतना ही तत्पर है तो फिर बीते वर्षों में राजनांदगांव के तत्कालीन कलेक्टर द्वारा 400 से अधिक खसरों पर खरीदी बिक्री पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया गया था। उन खसरों को संज्ञान में लेते हुए कितने नियमितीकरण हुए और कितने मामले लेन-देन करके शासन के नियम विरूद्ध नियमितीकरण किया गया। इसकी भी जाँच की जानी चाहिए। इसकी जांच हुई तो चौंकाने वाले खुलासे होंगे। यही नहीं निगम आयुक्त के द्वारा पिछले 07 वर्षो में पंजीयक जिला कार्यालय राजनांदगांव को जिन-जिन खसरों पर प्रतिबंध लगाने का पत्राचार किया गया है, उन्हें भी संज्ञान में लेते हुए जिला पंजीयक कार्यालय से जानकारी मंगवाई जाए तो गड़बड़ी स्पष्ट होगी। पता चलेगा कि निगम सीमा के किन-किन खसरों पर पंजीयक कार्यालय द्वारा प्रतिबंध लगाया गया और किन खसरों को लेन-देन करके शासन के नियम विरूद्ध रजिस्ट्री की गई है।
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