राजनांदगांव। बिना निविदा निकाले ठेका देना अपराध नही है, एक माह का प्रशिक्षण को ग्यारह दिन में रफा-दफा कर पेमेंट वसूलना अपराध नही है, जिस संस्था को नियम विपरीत ठेका दिया, लेकिन पेमेंट किसी व्यक्ति के नाम से ट्रांसफर किया जाना अपराध नही है, वरना आज कराते प्रशिक्षण का ठेका देना वाली अधिकारी, पेमेंट देने वाले अधिकारी और प्रशिक्षण देने वाले व्यक्ति आज जेल में होते, लेकिन यह सब जिला प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारीयों के आंख से सामने हो रहा है और जिम्मेदार अधिकारीगण आंख और मूंह बंद कर सब चुप-चाप देख रहे है। आरोप तो यह भी लग रहे है कि सबको अपना-अपना कमीशन पंहुच गया है, इसलिए जांच कौन करेगा क्योंकि दाग तो सबके दामन में है। दस्तोवजी साक्ष्य के साथ लिखित शिकायत छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसियेशन के लोग कर रहे है और दोषीयों के खिलाफ कार्यवाही की मांग भी हो रही है लेकिन सवाल वही की जांच कौन किसकी करेगा, क्यांेकि यहां तो सबके दमन में दाग है।


