एक्स रिपोर्टर न्यूज़ । राजनांदगांव
आबकारी विभाग के विवादित बाबू रामसिंह पाटिल को सिर्फ 20 दिन बाद ही अटेचमेंट निरस्त कर दोबारा राजनांदगांव पदस्थ किए जाने के आदेश ने विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस कर्मचारी पर ओवररेटिंग, कोचियागिरी को संरक्षण देने, अवैध शराब कारोबार संचालित कराने और कर्मचारियों पर दबाव बनाने जैसे आरोप लग चुके हों, जिसकी जांच अभी चल ही रही है, ऐसे कर्मचारी की वापसी ने राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। जब जांच करने वाले अधिकारी ही आरोप से घिरे कर्मचारी को संरक्षण देने लगे तो फिर न्याय की उम्मीद कैसे की जा सकती है?
दरअसल, आबकारी आयुक्त कार्यालय से जारी आदेश में मुख्य लिपिक रामसिंह पाटिल का संभागीय उड़नदस्ता दुर्ग में अटैचमेंट तत्काल प्रभाव से निरस्त करते हुए उन्हें पुनः सहायक आयुक्त आबकारी कार्यालय राजनांदगांव में कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं। आदेश सामने आते ही विभागीय कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
जोगी कांग्रेस ने लगाए है गंभीर आरोप
कुछ समय पहले जोगी कांग्रेस युवा मोर्चा के जिला पदाधिकारियों ने रामसिंह पाटिल के खिलाफ कलेक्टर और आबकारी विभाग को ज्ञापन सौंपकर गंभीर आरोप लगाए हैं। ज्ञापन में कहा गया था कि रामसिंह पाटिल लंबे समय से राजनांदगांव आबकारी विभाग में पदस्थ हैं, जबकि नियम अनुसार शासकीय कर्मचारियों का हर तीन वर्ष में तबादला होना चाहिए।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि जिले में होने वाले कई अवैध कार्यों में बाबू की भूमिका रहती है और उनके संरक्षण में कोचियागिरी तथा शराब की ओवररेटिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है। इतना ही नहीं, बार और दुकानों में अवैध रूप से शराब सप्लाई कराने तथा दूसरे राज्यों की शराब जिले में पहुंचाने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं।
कर्मचारियों पर दबाव और अवैध वसूली के आरोप
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया था कि जो कर्मचारी या प्लेसमेंट स्टाफ बाबू के निर्देशों का पालन नहीं करता, उसे हटवा दिया जाता है। छोटे-बड़े हर काम के लिए कमीशन मांगने और बिना कमीशन कार्य नहीं होने जैसे आरोप भी सामने आए थे। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि आबकारी विभाग में नियुक्त होने वाले कई लोकेशन अफसर बाबू की पसंद से बुलाए जाते हैं और उनके माध्यम से दुकानों से अवैध वसूली कराई जाती है। कुछ सुपरवाइजर और सेल्समैन को निजी दुश्मनी के चलते ब्लैकलिस्ट कराने का आरोप भी ज्ञापन में लगाया गया है। इसके अलावा आबकारी विभाग के टेंडर अपने रिश्तेदारों और करीबी लोगों को दिलाने जैसे आरोपों का भी जिक्र शिकायत में किया गया है।
चलते जांच के बीच वापसी
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि शिकायतों की जांच अभी चल ही रही है कि बाबू का अटैचमेंट निरस्त कर दिया गया, जबकि जांच रिपोर्ट आने तक संबंधित कर्मचारी को हटाए जाने का प्रावधान है ताकि जांच में कोई बाधा ना आए और निष्पक्षता बनी रहे। लेकिन यहाँ तो नियम विपरीत कार्य करके आदेश जारी करने वाले आबकारी अधिकारी ही जांच के घेरे में आ चुके हैं। इसे लेकर अब शहर में तरह-तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर विभाग की ऐसी क्या मजबूरी है कि विवादों में घिरे कर्मचारी को फिर से महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंप दी गई।
शराब के अवैध कारोबार को लेकर उठे सवाल
शहर और राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी जोरों पर है कि जिले में शराब के अवैध कारोबार, ओवररेटिंग और नेटवर्क संचालन को बनाए रखने के लिए ही नियम कानून को ताक पर रखकर इस तरह का खेल खेला जा रहा है। सूत्रों की माने तो शराब दुकान के कुछ हिमायती सुपरवाइजरो से कैरेक्टर सर्टिफिकेट बनाकर उच्च अधिकारियों तक पहुंचाया गया और रूलिंग पार्टी के नेताओं से सिफारिश लगवाई गई तब जाकर वापसी का जुगाड़ हुआ। ऐसा कर नेताओं ने अपनी ही पार्टी की छवि खराब की है। अब देखना यह होगा कि सरकार और आबकारी विभाग इस पूरे मामले में जांच कर स्पष्ट स्थिति सामने लाते हैं या फिर विवादों के बीच यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
इस मामले को लेकर जोगी कांग्रेस के जिलाध्यक्ष बिलाल सौलिन खान ने कहा कि महीना भी पूरा नहीं हुआ और विवादित बाबू को फिर से राजनांदगांव में पदस्थ कर दिया गया है। इस बात से स्पष्ट होता है कि आबकारी विभाग केवल भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहा है और जिले में शराब के अवैध कारोबार करने की खुली छूट दे रहा है।
सहायक आबकारी आयुक्त अभिषेक तिवारी ने कहा कि हमारी ओर से मुख्य लिपिक को बुलाने या अटैचमेंट खत्म करने के लिए किसी तरह का पत्राचार नहीं किया गया है। यह उच्च अधिकारियों का निर्णय है, मुझसे इस सम्बंध में कोई चर्चा नहीं की गई है।
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