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राजनांदगांव। शासकीय दिग्विजय महाविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग के तत्वाधान में प्राचार्य डॉ. के. एल. टांडेकर के मार्गदर्शन एवं विभागाध्यक्ष डॉ. डी. पी. कुर्रे के कुशल नेतृत्व में अर्थशास्त्र विषय में नोबेल पुरस्कार प्राप्त प्रो अमर्त्य सेन पर सारगर्भित संगोष्ठी का आयोजन संपन्न किया गया।

संगोष्ठी में विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल डॉ. के. एल. टांडेकर ने प्रो अमर्त्य सेन के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला प्रकाश डाला और बताया वे पहले भारतीय अर्थशास्त्री है जिन्हें नोबेल पुरस्कार के साथ-साथ भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया।

अध्यक्ष की आसंदी से अपनी बात रखते हुए डॉ. कुर्रे ने कहा कि 1943 में आए बंगाल के भयंकर अकाल ने प्रो सेन मन पर गंभीर असर डाला जिसमें लाखों लोगों की मौत हो गई थी। इसका प्रभाव ऐसा पड़ा की बड़े होकर उन्होंने गरीबी और भूख पर काम किया एवं इसी संदर्भ में उन्हें 1998 में अर्थशास्त्र के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. महेश श्रीवास्तव ने किया जबकि आभार प्रदर्शन डॉ. सुनीता श्रीवास्तव ने किया। इस अवसर पर एम. ए. अर्थशास्त्र से कुमारी भूमिका बंजारे, सागर सोनी, कुमारी ईश्वरी शर्मा, एवं गोपीचंद आदि ने प्रो सेन के संबंध में अपने अपने विचार रखे। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के साथ-साथ अर्थशास्त्र विभाग के प्राध्यापक डॉ. मीना प्रसाद एवं कुमारी ललिता रजत उपस्थित रहे।

By Amitesh Sonkar

Sub editor

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