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आधुनिक तकनीक एवं प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग कर वर्मी कम्पोस्ट शेड में वर्मी कम्पोस्ट के साथ मशरूम का उत्पादन… स्वसहायता समूह की महिलाएं

  • स्वसहायता समूह की महिलाएं नई तकनीक से कर रही मशरूम उत्पादन
  • कम समय व कम लागत में हो रहा अधिक लाभ
  • गौठान के वर्मी कम्पोस्ट शेड में मशरूम और वर्मी कम्पोस्ट का हो रहा एक साथ उत्पादन

राजनांदगांव 06 मार्च 2022। कौन कहता है कि कामयाबी किस्मत तय करती है, इरादों में दम हो तो मंजिलें भी झुका करती है…..ऐसी ही एक मिसाल डोंगरगांव विकासखंड के ग्राम अमलीडीह के गौठान में स्वसहायता समूह की महिलाओं ने पेश की है। आधुनिक तकनीक एवं प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग का एक बेहतरीन उदाहरण ग्राम अमलीडीह के गौठान में देखने को मिल रहा है। यहां नई तकनीक का उपयोग करते हुए वर्मी कम्पोस्ट शेड में वर्मी कम्पोस्ट के साथ मशरूम का उत्पादन किया जा रहा है। स्वसहायता समूह की महिलाएं वर्मी कम्पोस्ट शेड के तापमान को नियंत्रित कर मशरूम उत्पादन कर रहीं हंै। मशरूम आमतौर पर सर्दियों की फसल है, लेकिन नई तकनीक का उपयोग कर किसी भी मौसम में मशरूम उत्पादन किया जा सकता है।

इस तकनीक से कम लागत पर स्वसहायता समूह की महिलाएं एक ही स्थान पर वर्मी कम्पोस्ट एवं मशरूम का उत्पादन कर रहीं हंै। यह मशरूम उत्पादन का बहुत ही आसान एवं कारगर तरीका है। इस तकनीक का इस्तेमाल किसी भी गौठान में उपयोग कर अधिक लाभ प्राप्त कर सकती हैं। गौठान में इस विधि से स्वसहायता समूह की महिलाएं अब तक 8 टन वर्मी खाद एवं 40 किलो मशरूम का उत्पादन कर चुकी हैं। इस विधि से कम लागत में अधिक उत्पादन किया जा सकता है। इससे जगह की बचत होगी। साथ ही एक ही समय व जगह में मशरूम तथा वर्मी कम्पोस्ट का उत्पादन किया जा सकता है। ग्राम अमलीडीह गौठान में स्वसहायता समूह की महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए आजीविका संवर्धन से जुड़ी विभिन्न क्रियाकलापों का आरंभ किया जा रहा है। इसके तहत गौठान में स्वसहायता समूह की महिलाओं द्वारा डेयरी उद्योग, मत्स्य पालन, बकरी पालन, जीरो बजट खेती की शुरूआत किया जाएगा। गौठान को तकनीकी रूप से भी आधुनिक मशीनों से सुदृढ़ किया जा रहा है।

By Amitesh Sonkar

Sub editor

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