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1857 के विद्रोहो के विभिन्न आयामों पर व्याख्यान आयोजित

राजनांदगांव। शासकीय दिग्विजय महाविद्यालय के इतिहास विभाग द्वारा ‘‘1857 के विद्रोहो के विभिन्न आयामों’’ विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। प्रारंभ में विभागाध्यक्ष डाॅ. शैलेन्द्र ने व्याख्यान की उपयोगिता पर प्रकाश डाला और बताया कि वर्तमान समय में ऐसे आयोजन से छात्र-छात्राओं को लाभ प्राप्त होता है। 1857 के विद्रोह के संदर्भ में नये आयाम आ रहे है अतः उस पर चर्चा हेतु यह आयोजन किया गया। प्राचार्य डाॅ.के.एल. टांडेकर ने कहा कि ऐसे आयोजनों से महाविद्यालय तथा अन्य क्षेत्रों के विद्यार्थियों को ज्ञान की प्राप्ति होती है। 1857 के विद्रोहो के उपर हमेशा चर्चा होती रहती है, समयानुकूल नई – नई बाते सामने आ रही है। मुख्य वक्ता डाॅ. गिरिश कुमार सिंह प्राचार्य दुर्गा प्रसाद बलजीत सिंह पी.जी. काॅलेज अनुपशहर (उ.प्र.) ने अपने व्यक्तव्य में कहा कि क्या यह सैनिक विद्रोह था या एक राष्ट्रीय विद्रोह था या जैसा कि सावरकर ने इसे प्रथम स्वतंत्रता संग्राम कहा था। इस विषय पर उन्होने पक्ष तथा विपक्ष में तर्क देते हुए बहुत ही अच्छे ढंग से विस्तारपूर्वक बताया कि आधुनिक शोधों में 1857 की क्रान्ति को हितो की सहभागिता के आधार पर हुआ संघर्ष माना जाता है क्योकि इसमें शामिल होने वाले सभी लोगो के हित अलग-अलग थे लेकिन सबको एक समान शत्रु थे अंग्रेज। अंग्रेजों के विरुद्ध भले ही अपने स्वार्थ रहे हो पर सभी ने मिलकर अंग्रेजी साम्राज्य के विरुद्ध विद्रोह किया। इस व्याख्यान में शासकीय दू. बजरंग कन्या महाविद्यालय, रायपुर, शासकीय नेहरु महाविद्यालय डोंगरगढ़, शासकीय पी.जी. काॅलेज दंतेवाडा, शासकीय महाविद्यालय, सहसपुर, शासकीय पी.जी. महाविद्यालय, महासमुंद के प्राध्यापकों एवं छात्र-छात्राओं के साथ-साथ शोधार्थियों ने सहभागिता की आभार प्रदर्शन प्रो. हेमलता साहू द्वारा किया गया।

By Amitesh Sonkar

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