*करोड़ों की लागत से बनी रेंगाखार नहर में कुछ ही महीनों में दरारें, निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल*
कवर्धा।। सिंचाई व्यवस्था को मजबूत बनाने के उद्देश्य से रेंगाखार जलाशय से निर्मित सीसी लाइनिंग नहर अब अपनी निर्माण गुणवत्ता को लेकर सवालों के घेरे में है। करीब 2 करोड़ 24 लाख 10 हजार रुपये की लागत से निर्मित इस नहर में निर्माण कार्य पूरा होने के कुछ ही महीनों बाद कई स्थानों पर दरारें दिखाई देने लगी हैं। बरसात के दौरान सामने आई इस स्थिति ने क्षेत्र के किसानों की चिंता बढ़ा दी है।
ग्रामीणों और किसानों का कहना है कि यदि समय रहते तकनीकी परीक्षण और आवश्यक मरम्मत नहीं कराई गई, तो लगातार बारिश और पानी के दबाव से नहर को और अधिक नुकसान पहुंच सकता है। इससे आगामी सिंचाई सीजन में खेतों तक पानी पहुंचाने में बाधा उत्पन्न होने की आशंका है।
विभागीय सूचना बोर्ड के अनुसार नहर निर्माण कार्य जून 2025 में प्रारंभ हुआ था, जिसे मार्च 2026 में पूर्ण किया गया। लेकिन निर्माण पूर्ण होने के कुछ ही महीनों बाद विभिन्न स्थानों पर दरारें दिखाई देने लगीं। हालांकि इन दरारों के वास्तविक कारणों का पता तकनीकी जांच के बाद ही चल सकेगा।
रेंगाखार एवं आसपास के गांवों के अधिकांश किसान धान की खेती के लिए इसी नहर पर निर्भर हैं। ऐसे में नई बनी सीसी लाइनिंग में दरारें दिखाई देना किसानों के लिए चिंता का विषय बन गया है। ग्रामीणों ने मांग की है कि विशेषज्ञों की टीम से तत्काल स्थल निरीक्षण कराया जाए और यदि जांच में निर्माण गुणवत्ता में किसी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
बारिश बढ़ने से पहले मरम्मत की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि बारिश का दौर अभी जारी है। यदि क्षतिग्रस्त हिस्सों की समय रहते मरम्मत नहीं की गई, तो पानी के तेज बहाव से दरारें और चौड़ी हो सकती हैं, जिससे नहर की संरचना को गंभीर नुकसान पहुंचने की आशंका है। किसानों ने जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग से मांग की है कि तत्काल निरीक्षण, तकनीकी परीक्षण और आवश्यक सुधार कार्य कराकर नहर को आगामी सिंचाई सीजन से पहले पूरी तरह सुरक्षित एवं उपयोग योग्य बनाया जाए।


