एक्स रिपोर्टर न्यूज़ । राजनांदगांव
शासकीय जिला चिकित्सालय राजनांदगांव में हुए करीब 30 लाख रुपये के फर्नीचर खरीदी फर्जीवाड़े और उसके बाद दागी लेखापाल को नियम विरुद्ध तरीके से ‘मुख्य लिपिक’ की सबसे रसूखदार कुर्सी सौंपने के मामले ने यह साबित कर दिया है कि यहाँ नियम-कानून पूरी तरह दम तोड़ चुके हैं। मीडिया में लगातार हो रहे खुलासों और दस्तावेजी प्रमाणों के बावजूद, शासन-प्रशासन के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है। जमीनी हकीकत यह है कि इस गंभीर प्रशासनिक अराजकता पर अब तक कोई भी कार्रवाई नहीं हुई है। ऊपर से नीचे तक पूरा अमला शुतुरमुर्ग की तरह आंखें मूंदे बैठा है, जिससे भ्रष्ट तत्वों के हौसले सातवें आसमान पर हैं।
संलिप्त की मुट्ठी में अस्पताल की तिजोरी, सबूत मिटाने खुली छूट
इस पूरे मामले में सबसे डरावना और शर्मनाक पहलू यह है कि छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम की सरेआम धज्जियां उड़ाकर जिस संलिप्त कर्मचारी को लेखापाल से प्रमोट कर मुख्य लिपिक बनाया गया, वह आज भी पूरे रसूख के साथ अपनी मलाईदार कुर्सी पर जमा हुआ है। जांच टीम महीनों बाद भी एक कदम आगे नहीं बढ़ पाई है। प्रशासन ने संलिप्त कर्मचारी को प्रमोशन देकर सीधे तौर पर घोटाले के सबूतों को रफा-दफा करने की खुली छूट दे रखी है।
सिविल सर्जन और ट्रेजरी अफसर की चुप्पी दे रही ‘मूक सहमति’
अस्पताल के सर्वोच्च अधिकारी यानी सिविल सर्जन सह अस्पताल अधीक्षक और जिला प्रशासन के कोषालय अधिकारी की इस मामले पर रहस्यमयी चुप्पी सीधे तौर पर संदेह के घेरे में है। बिना वैध ‘प्रशासकीय स्वीकृति’ के वित्तीय सीमा से बाहर जाकर बिल पास होने के खेल पर ट्रेजरी ने आज तक कोई आपत्ति क्यों नहीं ली? घोटाला उजागर होने और जांच पेंडिंग होने के बावजूद कर्मचारी की गोपनीय चरित्रावली (CR) में दाग छुपाकर उसे प्रमोशन की हरी झंडी कैसे मिल गई? किसी भी स्तर पर कार्रवाई का न होना यह साफ इशारा करता है कि 30 लाख रुपये की इस मलाई का हिस्सा बहुत ऊपर तक गया है, इसीलिए कोई भी इस फाइल को छूने को तैयार नहीं है।
लोकतंत्र का खुला उपहास, जनता के साथ विश्वासघात
जो मामला छत्तीसगढ़ विधानसभा सत्र में उठा था, उस पर धरातल पर एक अदना सा एक्शन न होना हमारे लोकतांत्रिक सिस्टम का खुला उपहास है। सदन के भीतर कड़े कदम उठाने के बड़े-बड़े दावे करने वाले नेता और मंत्रालय के आला अफसर आज इस भ्रष्ट सिंडिकेट के आगे पूरी तरह पंगु नजर आ रहे हैं। जिला अस्पताल में गरीब जनता दवाइयों, स्ट्रेचर और इलाज के लिए कतारों में खड़ी होकर दम तोड़ रही है, लेकिन समूचा सरकारी तंत्र सिर्फ और सिर्फ दागी घोटालेबाजों की कुर्सी को सुरक्षित रखने की फिराक में लगा हुआ है।
कार्रवाई का शून्य होना नए घोटालों को खुला निमंत्रण
राजनांदगांव जिला प्रशासन की यह अंतहीन निष्क्रियता चीख-चीख कर कह रही है कि यहाँ ‘कानून का राज’ नहीं, बल्कि ‘लूटतंत्र’ का साम्राज्य चल रहा है। जब खुली अनियमितता, बिना प्रशासनिक स्वीकृति के लाखों के वारे-न्यारे और नियम विरुद्ध प्रमोशनों पर भी प्रशासन का हथौड़ा नहीं चलता, तो ईमानदार अधिकारियों का मनोबल पूरी तरह टूट जाता है। शासन की यह निष्क्रियता आने वाले दिनों में और बड़े घोटालों का रास्ता साफ कर रही है। अब देखना यह है कि यह दबी हुई चिंगारी आने वाले दिनों में क्या उग्र रूप लेती है, या फिर यह घोटाला भी हमेशा के लिए रद्दी की टोकरी में दफन हो जाएगा।
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