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एक्स रिपोर्टर न्यूज़राजनांदगांव

छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने जिला चिकित्सालय बसंतपुर, राजनांदगांव के एस.एन.सी.यू. वार्ड में चल रही घोर लापरवाही और तानाशाही के खिलाफ बिगुल फूंक दिया है। संघ ने सिविल सर्जन को एक बेहद तीखा शिकायत पत्र सौंपकर वार्ड प्रभारी डॉक्टर विक्रम बैद्य पर नर्सिंग स्टाफ के साथ लगातार दुर्व्यवहार, प्रताड़ना और भेदभाव करने के सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। कर्मचारी संघ ने साफ चेतावनी दी है कि अगर इस व्यवस्था को तुरंत नहीं सुधारा गया, तो अस्पताल परिसर में उग्र नारेबाजी और प्रदर्शन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी अस्पताल प्रशासन की होगी।

निजी अस्पतालों में ‘सेवा’, सरकारी ड्यूटी से नदारद

शिकायत पत्र में डॉक्टर की कार्यप्रणाली पर जो गंभीर आरोप लगाए गए हैं, वे सरकारी स्वास्थ्य तंत्र की धज्जियां उड़ाने वाले हैं। आरोप है कि शासकीय सेवा में होने के बावजूद डॉ. विक्रम वैद्य अक्सर अपनी ड्यूटी से नदारद रहते हैं और कथित तौर पर प्राइवेट अस्पतालों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वे अपनी मर्जी से आते-जाते हैं और घंटों ड्यूटी से गायब रहते हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि आपातकालीन स्थिति में जब नर्सिंग स्टाफ उन्हें फोन लगाता है, तो वे फोन तक रिसीव नहीं करते। इसके उलट, अस्पताल आने पर वे नर्सिंग स्टाफ को ही डराते और धमकाते हैं।

नर्सिंग स्टाफ पर काम का बोझ और सुरक्षा भगवान भरोसे

डॉक्टर की इस गैर-जिम्मेदाराना हरकत का सीधा असर अस्पताल की व्यवस्था और स्टाफ पर पड़ रहा है। प्रभारी डॉक्टर के गायब रहने के कारण नर्सिंग स्टाफ पर काम का मानसिक और शारीरिक बोझ अत्यधिक बढ़ गया है। नियमानुसार जो काम डॉक्टरों के अधिकार क्षेत्र (जैसे मरीजों को एडमिशन देना और एडमिशन फॉर्म भरना) में आते हैं, वे मजबूरन नर्सिंग स्टाफ को करने पड़ रहे हैं, जो पूरी तरह से संदेहास्पद और प्रोटोकॉल के खिलाफ है। स्टाफ का कहना है कि यदि इस दौरान कोई अप्रिय घटना या हादसा हो जाता है, तो उच्च अधिकारी चालाकी से पूरी जिम्मेदारी नर्सिंग स्टाफ पर मढ़ देते हैं।

रिफर के नाम पर दबाव और बदसलूकी

शिकायत में यह भी खुलासा हुआ है कि किसी खास मरीज को रायपुर या अन्य जगहों पर रिफर करने के दौरान नर्सों पर जबरन एम्बुलेंस में साथ जाने का अनुचित दबाव बनाया जाता है। महिला कर्मचारियों और नर्सिंग स्टाफ के साथ हो रहा यह भेदभाव और दुर्व्यवहार अब बर्दाश्त से बाहर हो चुका है। संघ ने दावा किया है कि डॉक्टर के इस तरह आने-जाने और घंटों गायब रहने के पुख्ता प्रमाण अस्पताल के सीसीटीवी कैमरों में कैद हैं।

आर-पार की लड़ाई के मूड में कर्मचारी संघ

छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के जिला अध्यक्ष लभेश पगारे द्वारा हस्ताक्षरित इस पत्र में प्रशासन को सीधे शब्दों में चेतावनी दी गई है। संघ ने मांग की है कि इस पूरे मामले पर तत्काल संज्ञान लेकर त्वरित निराकरण किया जाए और जॉब डिस्क्रिप्शन (प्रोटोकॉल) के तहत ही काम लिया जाए। यदि महिला कर्मचारियों के साथ हो रहे इस मानसिक उत्पीड़न और दुर्व्यवहार को तुरंत नहीं रोका गया, तो संघ उग्र विरोध प्रदर्शन के लिए बाध्य होगा। अब देखना यह है कि इस गंभीर शिकायत के बाद जिला प्रशासन और सिविल सर्जन इस ‘लापरवाह’ डॉक्टर पर क्या ठोस कार्रवाई करते हैं, या फिर हमेशा की तरह मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।

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