किशुनगढ़ निवासी पर कुछ दबंगों का अत्याचार, शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं, पंडरिया थाना क्षेत्र में अंधविश्वास और दबंगई का खौफ इस कदर हावी है
कवर्धा। एक परिवार आज अपनी जान बचाने के लिए दर-दर भटक रहा है। मामला केवल मारपीट का नहीं बल्कि कानून की खुली धज्जियाँ उड़ाने का है। पंडरिया थाना अंतर्गत किशुनगढ़ निवासी पीड़ित कांशीराम टंडन ने पुलिस अधीक्षक से लेकर कलेक्टर और पुलिस महानिदेशक तक गुहार लगाई, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी कारर्वाई के नाम पर शून्य है। यही नहीं, आरोपी खुलेआम पुलिस संरक्षण का हवाला देकर धमकी दे रहे हैं। सवाल यह है कि जब कानून साफ-साफ कहता है कि टोना टोटका महज अंधविश्वास है और इसके नाम पर किसी को प्रताड़ित करना अपराध है, तो फिर आखिर पुलिस किसके दबाव में चुप बैठी हुई है। रात में घर में घुसकर हमला घटना 5 जुलाई 2025 की रात करीब 9.30 बजे की है जब ग्राम किशनगढ़ निवासी कांशीराम टंडन अपने परिवार के साथ घर में थे। तभी पड़ोसी ऋषि बंजारे अपने पूरे परिवार और रिश्तेदारों के साथ घर में घुस आया। पीड़ित का कहना है कि आरोपियों ने उनके छोटे बच्चों और पत्नी के साथ मारपीट की और उन्हें डंडे से मारा, जिससे उनके पैर में गहरी चोटें आईं और खून बह निकला। पीड़ित के अनुसार हमलावरों ने गाली-गलौज करते हुए उन पर टोना टोटका करने का आरोप लगाया और कहा हमने तुम्हारे परिजनों की मौत करवाई, एक्सीडेंट करवाया, अब तुम्हें भी जान से मार देंगे। कांशीराम का दावा है कि उनके पिता की मौत. 2002 में हुई थी और वर्ष 2012-13 में उनके ऊपर संदिग्ध एक्सीडेंट भी कराए गए थे जिसके लिए भी यही लोग जिम्मेदार है।
पुलिस वालों का नाम लेकर दबाव
आवेदन में यह भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं कि हमलावरों ने तीन पुलिसकमियाँ, डोमन, रेखराम और पारस का नाम लेकर कहा कि ये हमारे परिवार के आदमी हैं, केस को रोकते रहेंगे, तुम्हारी जितनी भी रिपोर्ट होगी, उसका कोई असर नहीं होगा। यानी आरोपी न सिर्फ अपराध कर रहे हैं बल्कि घर के तीन लोग पुलिस विभाग में है कहकर कानून-व्यवस्था धज्जियाँ उड़ाते हुए पुलिस का नाम लेकर खुलेआम दहशत फैला रहे हैं। पीड़ित का कहना है कि कई बार थाना पंडरिया में आवेदन देने के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं की गई। वहीं पुलिस अधिक्षक की कलेक्टर और पुलिस महानिदेशक को भी आवेदन दिए गए, मगर कारर्वाई नहीं हुई। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या दबंगों और पुलिस संरक्षण के चलते कानून सिर्फ कागजों में रह गया है। इससे परेशान पीड़ित एक बार फिर कलेक्टर को ज्ञापन देकर कार्रवाई की मांग की गई है।


