एक्स रिपोर्टर न्यूज़ । राजनांदगांव
छत्तीसगढ़ में शराब दुकानों में तय कीमत से अधिक वसूलने (ओवररेटिंग) का खेल नया नहीं है, अब ऐसे भ्रष्ट तत्वों पर गाज गिरनी शुरू हो गई है। लेकिन राजनांदगांव में स्थिति भिन्न है। कार्यालय उप महाप्रबंधक सी.एस.एम.सी.एल. राजनांदगांव द्वारा 8 जुलाई 2026 को जारी एक कड़े अनुशंसा पत्र ने आबकारी विभाग और शराब कोचियों के बीच हड़कंप मचा दिया है। सरकारी अनुशंसा के मुताबिक, जिले की मदिरा दुकानों में मदिरा प्रेमियों की जेब पर खुलेआम डाका डालने वाले 4 प्लेसमेंट कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। लेकिन इस कार्रवाई के बाद एक बड़ा और गंभीर पहलू सामने आया है कि स्थानीय अधिकारी और उच्च पदस्थ कर्मचारी इन भ्रष्ट सेल्समैनों को बचाने और उन्हें संरक्षण देने में पूरी ताकत से जुटे हुए हैं।
जांच टीम ने रंगे हाथों पकड़ा खेल, पर स्थानीय तंत्र मौन
यह पूरी कार्रवाई उपायुक्त आबकारी, संभागीय उड़नदस्ता दुर्ग संभाग की आकस्मिक जांच के बाद की गई है। उड़नदस्ता टीम ने जब राजनांदगांव जिले की दुकानों पर दबिश दी, तो जो सच सामने आया वह चौंकाने वाला था। 9 मई 2025 को कंपोजिट मदिरा दुकान ‘चिखली (सोमनी पूर्व)’ में जांच के दौरान पाया गया कि 12 विदेशी मदिरा गोवा व्हिस्की (प्रत्येक 180 एमएल) खरीदने पर कुल निर्धारित दर 1440/- रुपये के स्थान पर ग्राहकों से जबरन 1500/- रुपये वसूले जा रहे थे। प्रति क्वार्टर तय कीमत से ₹60 अधिक की अवैध वसूली की जा रही थी। इस गोरखधंधे में मुख्य विक्रेता धनपत ध्रुव और विक्रेता योगेश भावे को सीधे तौर पर दोषी पाया गया, जिनके खिलाफ आबकारी अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।
अर्जुनी दुकान में भी चल रहा था महालूट का धंधा
लूट का यह सिलसिला सिर्फ चिखली तक सीमित नहीं था। उसी दिन उड़नदस्ता टीम ने कंपोजिट मदिरा दुकान ‘अर्जुनी’ में भी इसी तरह का बड़ा फर्जीवाड़ा पकड़ा। यहाँ भी 12 विदेशी मदिरा गोवा व्हिस्की पर ₹1440 की जगह ₹1500 वसूले जा रहे थे। इस दुकान के मुख्य विक्रेता चंद्रशेखर भट्ट के इशारे पर सेल काउंटर से विक्रेता रूमेश सोनकर धड़ल्ले से अधिक दाम पर शराब बेच रहा था। इन दोनों के खिलाफ भी आबकारी अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर इन्हें ब्लैकलिस्ट करने की अनुशंसा की गई है।
स्थानीय अधिकारियों का वरदहस्त: क्यों मौन है जिला प्रशासन?
इस सरकारी आदेश ने साफ कर दिया है कि शराब दुकानों पर बैठने वाले ये सेल्समैन खुद को किसी राजा से कम नहीं समझते। लेकिन सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यह है कि क्या ये अदने से सेल्समैन इतने बड़े पैमाने पर अवैध वसूली अकेले अपने दम पर कर रहे थे? सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार, राजनांदगांव के स्थानीय अधिकारी और विभागीय कर्मचारी इन दागी सेल्समैनों को अंदरूनी तौर पर पूरा संरक्षण दे रहे हैं। आबकारी विभाग के स्थानीय साहबों के वरदहस्त और मूक सहमति के बिना शहर के नाक के नीचे इस तरह खुलेआम ग्राहकों को लूटना मुमकिन ही नहीं है। उड़नदस्ते की कार्रवाई के बाद भी स्थानीय तंत्र द्वारा इन भ्रष्टों का बचाव करना यह साबित करता है कि इस महालूट की मलाई ऊपर तक जा रही थी।
ब्लैकलिस्टेड कर्मचारियों की सूची आई सामने
विभाग द्वारा जारी ब्लैकलिस्ट प्रारूप में धनपत ध्रुव (मुख्य विक्रयकर्ता, चिखली दुकान), योगेश भावे (विक्रयकर्ता, चिखली दुकान), चंद्रशेखर भट्ट (मुख्य विक्रयकर्ता, अर्जुनी दुकान) और रूमेश सोनकर (विक्रयकर्ता, अर्जुनी दुकान) शामिल है।
जनता की मांग: संरक्षण देने वाले अधिकारियों पर भी हो एफआईआर
उप महाप्रबंधक सी.एस.एम.सी.एल. राजनांदगांव ने छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (रायपुर) के प्रबंध संचालक को पत्र भेजकर इन चारों को पूरी तरह ब्लैकलिस्ट करने की अनुशंसा कर दी है। लेकिन आम जनता और सजग नागरिकों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि सिर्फ इन मोहरों (सेल्समैनों) को ब्लैकलिस्ट करना काफी नहीं है। असली गुनहगार तो वो स्थानीय अधिकारी और कर्मचारी हैं जो अपनी आंखों पर पट्टी बांधकर इन अवैध कार्यों को फलने-फूलने दे रहे थे और अब इन्हें बचाने की जुगत में लगे हैं। जनता की मांग है कि इन भ्रष्ट सेल्समैनों के साथ-साथ इन्हें संरक्षण देने वाले स्थानीय अधिकारियों की संपत्ति की जांच हो और उन पर भी आपराधिक मुकदमा चलाकर जेल भेजा जाए।
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