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शिलान्यास के 8 साल बाद भी नहीं बढ़ी डोंगरगढ़-कवर्धा-कटघोरा रेललाइन, जिलेवासियों की उम्मीदों पर ब्रेक

कवर्धा। बहुप्रतीक्षित डोंगरगढ़-कवर्धा-कटघोरा रेललाइन परियोजना वर्षों बाद भी कागजों से बाहर नहीं निकल पाई है। 6 अक्टूबर 2018 को तत्कालीन रेल मंत्री द्वारा कवर्धा के स्टेडियम में इस महत्वाकांक्षी परियोजना का शिलान्यास किया गया था, लेकिन करीब आठ वर्ष बीत जाने के बाद भी धरातल पर निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। इससे कबीरधाम सहित पूरे क्षेत्र के लोगों में निराशा बढ़ रही है।

शिलान्यास के दिन ही विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लागू हो गई थी। इसके बाद सरकार बदल गई और परियोजना की रफ्तार थम गई। सितंबर 2020 में केंद्र सरकार ने परियोजना को मंजूरी भी दे दी, लेकिन इसके बावजूद निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ पाया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वर्षों से रेललाइन के नाम पर केवल घोषणाएं और वादे किए गए, जबकि परियोजना को अमलीजामा पहनाने के लिए गंभीर प्रयास नहीं हुए।

प्रस्तावित 295 किलोमीटर लंबी रेललाइन डोंगरगढ़ से कटघोरा तक बनाई जानी है। इसमें कबीरधाम जिले के लगभग 61 किलोमीटर क्षेत्र में पटरी बिछेगी, जो जिले के 50 गांवों से होकर गुजरेगी। इनमें लोहारा तहसील के 15, कवर्धा के 23 और पंडरिया तहसील के 12 गांव शामिल हैं। परियोजना के तहत कुल 27 रेलवे स्टेशन प्रस्तावित हैं, जिनमें सहसपुर लोहरा, गंडई, छुईखदान, पंडरिया, बेरला, मुंगेली, तखतपुर और काठाकोनी जैसे प्रमुख स्टेशन शामिल हैं।

रेललाइन बनने से डोंगरगढ़, कबीरधाम और कोरबा के बीच आवागमन आसान होगा। साथ ही कोयला और अन्य खनिजों के परिवहन को गति मिलने के साथ रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। रेलवे स्टेशन, परिवहन और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों से स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलने की उम्मीद है।

जिलेवासियों का कहना है कि यह परियोजना क्षेत्र के विकास की आधारशिला साबित हो सकती है। ऐसे में सरकार को इसे प्राथमिकता देते हुए जल्द निर्माण कार्य शुरू करना चाहिए, ताकि वर्षों से रेल सुविधा की प्रतीक्षा कर रहे लोगों का सपना साकार हो सके।

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