एक्स रिपोर्टर न्यूज़ । राजनांदगांव
राजनांदगांव के स्वास्थ्य विभाग में इन दिनों फिल्म ‘दामिनी’ का वह मशहूर डायलॉग जीवंत हो उठा है—“तारीख पर तारीख, तारीख पर तारीख!” छुरिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में मरीजों के भोजन और जननी शिशु सुरक्षा योजना के 7,28,610 रुपये के बजट में हुई खुली वित्तीय अनियमितता को दबाने का खेल अब अपने चरम पर पहुँच चुका है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कार्यालय द्वारा गठित तीन सदस्यीय जांच कमेटी सिर्फ कैलेंडर के पन्ने पलट रही है, जबकि असली मकसद लेखापाल को बिना किसी आंच के सुरक्षित रिटायरमेंट दिलाना है।
जांच कमेटी बनी ‘टाइम पास’ का जरिया
पुख्ता शिकायत के बाद CMHO कार्यालय ने आनन-फानन में तीन सदस्यीय जांच टीम का गठन तो कर दिया था। लेकिन आज हफ़्तों बीत जाने के बाद भी नतीजा ‘ढाक के तीन पात’ ही है। हर बार जब मीडिया और जनता इस मामले पर सवाल उठाती है, तो विभाग से एक ही रटा-रटाया जवाब मिलता है—“जांच चल रही है, जल्द ही रिपोर्ट आएगी।” सवाल यह है कि जब वित्तीय नियमों के उल्लंघन और बिना अनुमति पिछले साल के बिलों को पास कराने के दस्तावेजी सबूत पहले दिन से टेबल पर मौजूद हैं, तो इस जांच में कौन सा ‘रॉकेट साइंस’ लगाया जा रहा है? साफ है कि यह देरी किसी जांच के लिए नहीं, बल्कि संबंधित कर्मचारी को बचाने के लिए की जा रही है।
क्रोनोलॉजी समझिए: रिटायरमेंट करीब, कार्रवाई गायब
इस सुस्ती के पीछे की क्रोनोलॉजी को समझना बेहद जरूरी है। लेखापाल के रिटायरमेंट की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। विभागीय नियम कहते हैं कि यदि सेवाकाल के दौरान कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो कर्मचारी शान से अपनी पूरी पेंशन और फंड लेकर विदा हो जाएगा।
राजनांदगांव का स्वास्थ्य विभाग इसी फिराक में बैठा है। रणनीति बहुत साधारण और शातिर है—जांच के नाम पर तब तक समय काटो, जब तक कर्मचारी का विदाई समारोह न आ जाए! एक बार कर्मचारी सिस्टम से बाहर हो गया, तो यह पूरी फाइल विभागीय स्तर पर स्वतः ही बंद कर दी जाएगी। यह जनता की गाढ़ी कमाई पर और सरकार के ‘सुशासन’ के दावों पर सबसे बड़ा तमाचा है।
उच्च अधिकारियों को की जाएगी शिकायत
स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी यह मुगालता पालना बंद कर दें कि समय बीतने के साथ लोग इस घोटाले को भूल जाएंगे। यदि जल्द ही जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सौंपकर लेखापाल को निलंबित नहीं किया और उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं कराई, तो यह मामला सीधे उच्च अधिकारियों की चौखट पर ले जाया जाएगा।
प्रशासन याद रखे, यदि सेवानिवृत्ति के नाम पर इस मामले पर लीपापोती की गई, तो न सिर्फ लेखापाल बल्कि जांच में देरी करने वाले अधिकारियों को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। अब ‘तारीख’ नहीं, सीधे ‘कार्रवाई’ चाहिए।
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