एक्स रिपोर्टर न्यूज़ । राजनांदगांव
सात महीने बीत जाने के बाद भी राजनांदगांव जिला अस्पताल के प्रबंधन की नींद नहीं टूटी है। सरकारी तंत्र की इस कुंभकर्णी नींद ने यह साफ कर दिया है कि यहां नियम-कानून सिर्फ कागजों पर आम जनता को डराने के लिए हैं, रसूखदारों के लिए तो लाल कालीन बिछाई जाती है। डॉ. तरुण कोठारी के अवैध तरीके से निजी क्लीनिक संचालन और सरकारी आवास के दोहरे लाभ के खिलाफ हुई पुख्ता शिकायत पर आज तक एक इंच भी कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी है।
कार्रवाई के नाम पर सिर्फ सन्नाटा और लीपापोती
शिकायतकर्ता ने 28 अक्टूबर 2025 को सिविल सर्जन को सारे सबूत सौंपे थे। तब से लेकर आज तक मौसम बदल गए, लेकिन नहीं बदली तो जिला अस्पताल के अफसरों की ढर्रे वाली कार्यशैली। कार्रवाई करना तो दूर, अस्पताल प्रशासन ने मामले को इस कदर ठंडे बस्ते में डाल दिया है जैसे कोई शिकायत हुई ही न हो।
जब भी इस मामले में जवाब मांगा जाता है, अधिकारी बगलें झांकने लगते हैं। सूत्रों की मानें तो अंदरखाने सिर्फ एक ही खेल चल रहा है—“मामले को इतना लंबा खींचो कि जनता और शिकायतकर्ता दोनों भूल जाएं।” लेकिन भ्रष्ट तंत्र यह भूल रहा है कि जनता की अदालत में फाइलों को गायब करके गुनाह नहीं छुपाए जा सकते।
प्रबंधन को मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री के आदेशों का खौफ नहीं
छत्तीसगढ़ सरकार लगातार स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और डॉक्टरों की शत-प्रतिशत उपस्थिति का ढिंढोरा पीट रही है। मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री के कड़े निर्देशों के बावजूद राजनांदगांव का स्वास्थ्य महकमा अपनी ही धुन में मस्त है।
सवाल नंबर 1: आखिर सिविल सर्जन किस दबाव में डॉ. तरुण कोठारी को बचा रहे हैं?
सवाल नंबर 2: क्या विभाग के पास इस बात का कोई जवाब है कि एक सरकारी डॉक्टर कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में धड़ल्ले से प्राइवेट प्रैक्टिस कैसे कर रहा है?
सवाल नंबर 3: कार्रवाई न होना क्या इस बात का सीधा सबूत नहीं है कि ऊपर से लेकर नीचे तक लेन देन की बंदरबांट हुई है?
मरीजों के हक पर डाका, डॉक्टरों की मौज
इस लचर व्यवस्था का खामियाजा राजनांदगांव की गरीब जनता भुगत रही है। जिला अस्पताल में डॉक्टरों के केबिन खाली पड़े रहते हैं क्योंकि साहब लोग अपने निजी अड्डों पर मोटी फीस वसूलने में व्यस्त हैं। जब रक्षक ही भक्षक को संरक्षण देने लगे, तो आम आदमी न्याय के लिए कहां जाए? सिविल सर्जन की यह रहस्यमयी चुप्पी सीधे तौर पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रही है।
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