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एक्स रिपोर्टर न्यूज़ । राजनांदगांव

अवैध कारोबार के लिए कोचियों को सरकारी दुकानों से बल्क में शराब मिल रही है। इस बात की पुष्टि हम नहीं पुलिस की क्राइम डाटा कर रही है। सोमवार (19/01/2026) को राजनांदगांव जिला पुलिस की ओर से जारी की गई प्रेस रिलीज में दावा किया गया है कि बीते तीन महीनों में पुलिस ने छापामार कार्रवाई कर भारी मात्रा में छत्तीसगढ़ में निर्मित देशी एवं विदेशी शराब जब्त की है।

पुलिस के मुताबिक धारा 34(1), 34(2) आबकारी एक्ट के तहत 92 प्रकरणों में 95 आरोपियों से 522.40 बल्क लीटर देशी प्लेन शराब कीमती 2,34,860/- रुपये जब्त किया गया। इसी तरह धारा 34(1), 34(2) आबकारी एक्ट के तहत 30 प्रकरणों में 33 आरोपियों से 133.23 बल्क लीटर अंग्रेजी शराब कीमती 88,540/- रुपये जब्त किया जा चुका है। इसके साथ ही देशी/विदेशी शराब परिवहन में प्रयुक्त 39 दोपहिया वाहन, कीमती 15,65,000/- रुपये की जब्ती की कार्रवाई की जा चुकी है।

इससे साफ है कि किस तरह आबकारी विभाग ही शराब के अवैध कारोबार को बढ़ावा देने में लगा हुआ है। ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि शासकीय शराब दुकानों की मॉनिटरिंग का जिम्मा पूरी तरह आबकारी विभाग को ही दिया गया है। विभागीय अधिकारियों के जानकारी के बिना शराब की एक बोतल भी इधर से उधर नहीं हो सकती।

Crime reporter@राजनांदगांव: प्रतिबंध के बाद भी धर्मनगरी डोंगरगढ़ और डोंगरगांव में तेजी से फलफूल रहा शराब का अवैध कारोबार, सरकारी तंत्र के संरक्षण में प्लेसमेंट कर्मी संभाल रहे कोचिया नेटवर्क, ऐसा “सुशासन” देख जनता में रोष, अफसर खामोश…

राजस्व बढ़ाने की आड़ में काला कारनामा

सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार आबकारी विभाग के अफसरो को शराब से राजस्व बढ़ाने की महती जिम्मेदारी दी गई है। गिनती के दुकानों से तय लक्ष्य में राजस्व की प्राप्ति होना असंभव है, ऐसे में कोचियागिरी को बल मिलना ही है। भले ही अवैध कारोबार समाज के लिए बुरा हो लेकिन इसका लाभ सभी को चाहिए। यही वजह है कि विभागीय तंत्र शासन का राजस्व बढ़ाने के साथ-साथ अपना राजस्व बढ़ाने में भी लगा हुआ है। इसीलिए दुकानों से कोचियों को 200 से 300 रुपए प्रति पेटी अतिरिक्त रुपए लेकर अवैध तरीके से शराब बेची जा रही है। जिससे कोचियागिरी को बढ़ावा मिल रहा है।

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