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कवर्धा में मुरुम माफिया बेखौफ, प्रशासन की नाक के नीचे अवैध उत्खनन जारी

खनिज विभाग की मिलीभगत के आरोप

कवर्धा। शहर में अवैध मुरुम खनन का धंधा बेखौफ तरीके से फल-फूल रहा है। सरोधा मार्ग स्थित आईटीआई कॉलेज के पीछे लगभग 2 से 3 एकड़ क्षेत्र में अवैध उत्खनन लगातार हो रहा है, और
प्रतिदिन भारी मात्रा में मुरुम ट्रकों के जरिए बाहर भेजा जा रहा है।
सबसे हैरानी की बात यह है कि यह पूरा खेल प्रशासन की नाक के नीचे वर्षों से संचालित हो रहा है, जबकि खनिज विभाग पर मिलीभगत और संरक्षण के गंभीर आरोप स्थानीय नागरिकों द्वारा लगाए जा रहे हैं।

कवर्धा शहर से मात्र 5 किलोमीटर के दायरे में अब तक अवैध रूप से मुरम का उत्खनन और परिवहन हो चुका है लेकिन खनिज विभाग और प्रशासन द्वारा अब तक किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गई है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि ग्राम तारो अंतर्गत आईटीआई परिसर के पीछे की जमीन पर प्रतिदिन सुबह से लेकर देर रात तक जेसीबी और डंपरों की आवाजाही होती रहती है। प्रतिदिन दर्जनों ट्रक मुरुम भरकर निर्माण स्थलों तक पहुंचाए जाते हैं, लेकिन किसी भी अधिकारी की नजर इस पर नहीं जाती।

क्षेत्रवासियों का आरोप है कि यह पूरा खेल अधिकारियों और दलालों की मिलीभगत से चल रहा है, जिसके बदले मोटी रकम वसूली जाती है। शहर से कुछ किलोमीटर की दूरी पर लगा यह क्षेत्र शैक्षणिक, आवासीय और कृषि भूमि से घिरा हुआ है। नियम के अनुसार यहां इस प्रकार का खनन प्रतिबंधित है, लेकिन प्रभावित जमीन चीरकर बड़े पैमाने पर लाल-पीले मुरुम की निकासी की जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार यह खेल कम से कम छह महीने से जारी है।

प्रदेश सचिव युवा कांग्रेस आकाश केशरवानी ने आरोप लगया है कि कवर्धा जिले में अवैध मुरम खनन का कार्य तेज़ी से जारी है। बीजेपी सरकार के प्रभावशाली नेताओं के संरक्षण में खनन माफिया खुलेआम हजारों ट्रकों में मुरम की चोरी कर रहे हैं जबकि खनिज विभाग गहरी नींद में सोया हुआ प्रतीत होता है।

ब्लॉक कांग्रेस ग्रामीण अध्यक्ष मणिकांत ने बताया कि सरकारी संरक्षण में चल रहे इस अवैध खनन से स्थानीय ग्रामीण, शहरवासियों में भारी आक्रोश व्याप्त है। लोगों का आरोप है कि बीजेपी सरकार की नीति खनन माफियाओं को सुरक्षा और खुली छूट देने की है जिसके चलते प्राकृतिक संसाधनों की लूट हो रही है और पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है।

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