एक्स रिपोर्टर न्यूज। राजनांदगांव
कार्रवाई करने के बजाय 27 हजार रुपए का समझौता कराकर सीएमएचओ ने कृष्णा हॉस्पिटल को क्लीन चीट दे दी। इस मामले को लेकर स्वास्थ विभाग की जमकर किरकिरी हो रही है। सीधे कहे तो प्रशासनिक कार्यप्रणाली का मजाक बनाकर रख दिया गया है। यही हाल रहा तो अन्य मामलों में कार्रवाई होना मुश्किल ही है, क्योंकि शहर के दूसरे निजी अस्पताल और क्लीनिक के मामले अभी भी गर्म है। इन मामलों में सीएमएचओ क्या एक्शन लेते है यह देखना बाकी है?
इनमें से एक मामला डॉ. चेतन साहू के क्लीनिक का भी है। क्लीनिक के आड़ में यहां अस्पताल का संचालन किया जा रहा था। मामले की शिकायत करने के बावजूद सीएमएचओ कार्रवाई के लिए ध्यान नहीं दे रहे है। मीडिया से दबाव बनाने पर क्लीनिक का सिर्फ निरीक्षण किया गया है। सूत्रों की माने तो जल्द ही दूसरा निरीक्षण कराकर क्लीनिक को भी क्लीन चीट देने की तैयारी की जा रही है। यही हाल रहा तो शहर सहित जिलेभर में अवैध रूप से संचालित होने वाले क्लीनिक और दवाखाना की बाढ़ आ जाएगी। जहां इलाज के नाम पर मरीजों को ठगा जाएगा।
सेटलमेंट के लिए लगातार किया जा रहा था प्रयास
गौरतलब है कि कृष्णा हॉस्पिटल मामले की शिकायत दो महीने पूर्व की गई थी। इसके बावजूद सीएमएचओ की ओर से कार्रवाई में लेटलतिफी की जाती रही। स्मार्ट कार्ड पैकेज के अलावा अतिरिक्त रुपए लेने का मामला गंभीर था। अस्पताल का लाइसेंस संस्पेंड हो सकता था, लगातार कहने पर सीएमएचओ ने मामले की जांच कराई, जिसमें अतिरिक्त रुपए लेने बात स्पष्ट हो रही थी। ऐसे में कृष्णा हॉस्पिटल प्रबंधन हरकत में आ गया। इसके बाद लगातार शिकायकर्ता से संपर्क साधने का प्रयास किया जाता रहा। सेटलमेंट के लिए कई बार शिकायकर्ता को सीएमएचओ कार्यालय भी बुलाया गया, लेकिन शिकायतकर्ता समझौता के लिए राजी नहीं थे। अंत में बात मनवाते हुए सीएमएचओ ने अपने सामने ही 27 हजार रुपए देकर मामले में समझौता करा दिया।
हर सप्ताह टीएल बैठक फिर भी कलेक्टर नहीं ले रहे संज्ञान
गौरतलब है कि प्रशासनिक कार्यप्रणाली को दुरुस्त रखने के लिए कलेक्टर हर सप्ताह मंगलवार को टीएल यानी समय सीमा की बैठक रखते है। इस बैठक में सभी विभाग के अधिकारियों को बुलाया जाता है, लेकिन हैरत की बात ये है कि अभी तक स्वास्थ विभाग के गंभीर मामले में कलेक्टर की ओर से कोई टिप्पणी नहीं की गई है। जबकि कलेक्टर को इन मामलो को स्वयं संज्ञान में लेते हुए कार्रवाई के लिए अधिकारियों को निर्देशित करने की जरुरत है।
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