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राजनांदगांव। शिक्षा का अधिकार कानून के अंतर्गत प्रायवेट स्कूलों में गरीब बच्चों को पढ़ाने के दिए शासन द्वारा दी जाने वाली राशि में व्यापक स्तर पर अनियमितता हो रही है, जिसको लेकर छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसियेशन के द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी राजेश सिंह से जांच की मांग भी कर रहे है, लेकिन जब डीईओ ने जांच में रूचि नहीं दिखाया तो एसोसियेशन के प्रदेश अध्यक्ष क्रिष्टोफर पॉल ने संयुक्त संचालक दुर्ग के समक्ष उपस्थित होकर वाइडनेयर स्कूल में हुए लगभग डेढ़ करोड़ की वित्तीय अनियमितता की तत्काल निष्पक्ष जांच कराने की मांग की थी, जिसके पश्चात् संयुक्त संचालक ने जिला शिक्षा अधिकारी कर्वधा एमके गुप्ता को जांच कर एक सप्ताह के भीतर जांच प्रतिवेदन अभिमत सहित प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।
श्री पॉल ने बताया कि वाइडनेयर स्कूल जो कि राजगामी संपदा न्यास की भूमि पर वर्ष 1976 से संचालित है, तत्कालीन कलेक्टर ने वर्ष 1976 में संपदा की 1,50,000 वर्ग फीट भूमि स्कूल संचालित करने 30 वर्ष के लिए लीज पर दिया था, यानि यह स्कूल राजगामी संपदा न्यास की स्वामीत्व की भूमि पर संचालित हो रही है और शिक्षा का अधिकार कानून की धारा 12 की उपधारा 2 में यह स्पष्ट लिखा हुआ है कि यदि कोई प्रायवेट स्कूल सरकारी भूमि पर संचालित हो रही है, तो उस स्कूल को गरीब बच्चों को निःशुल्क शिक्षा देने होगा और वह स्कूल प्रतिपूर्ति राशि का हकदार भी नहीं होगा। इसके बावजूद इस स्कूल को वर्ष 2011 से लेकर 2020 तक लगभग डेढ़ करोड़ की प्रतिपूर्ति राशि दिया गया, जो वित्तीय अनियमितता है।
श्री पॉल का कहना है यदि इसमें निष्पक्षता के साथ जांच हुई, तो वाइडनेयर के साथ नोडल प्राचार्य, डीईओ और डिलिंग पर प्राथमिकी दर्ज हो सकता है।

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