राजनांदगांव। रजिस्ट्री कार्यालय में इनदिनों दलालों के कब्जे से आम आदमी काफी परेशान है। प्रत्येक रजिस्ट्री के लिए कमीशन के तौर पर लोगों को मोटी रकम खर्च करनी पड़ रही है। यहां हर प्रकार की रजिस्ट्री के लिए अलग-अलग कमीशन बंधा हुआ है। जब भी कोई कृषि भूमि या व्यवसायिक भूमि की खरीदी-बिक्री होती है और लोग यहां खरीदी गई भूमि की रजिस्ट्री कराने के लिए पहुंचते हैं तो सबसे पहले उनका सामना दलालों से ही पड़ता है। इसके बाद पर्चा-पट्टा खरीदी से लेकर नोटरी सहित प्रत्येक कार्य के नाम पर रजिस्ट्री कराने वालों से मोटी रकम वसूली जाती है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार रजिस्ट्री कार्यालय में किसी को चाहे कोई भी काम पड़े,बिना दलालों के चंगुल में फंसे वह कार्य होता ही नहीं है। बताया जाता है कि कार्यालय शुरू होने से लेकर शाम तक यहां दलालों का कब्जा बना रहता है। इनका काम केवल उन लोगों को तलाशना होता है जिन्होंने भूमि की खरीदी-बिक्री की हो। चाहे स्टाम्प पेपर की खरीदी-बिक्री का कार्य हो या नोटरी सहित अन्य कोई भी कार्य। अपनी बातों के जाल में फंसाकर दलाल रजिस्ट्री कराने आने वालों से मोटी रकम वसूल कर ही लेते हैं। वह भी निर्धारित से कई गुणा ज्यादा बड़ी रकम होती है।
लंबे समय से चल रहा कमीशन का खेल
मिली जानकारी के अनुसार भूमि की खरीदी बिक्री में भी जमकर कमीशन का खेल चल रहा है। लोगों का तो यहां तक कहना है कि यहां माथा देखकर तिलक लगाया जाता है। बताया जाता है कि कृषि भूमि की रजिस्ट्री में कमिशन का अलग रेट फिक्स है तो वहीं व्यवसायिक भूमि की खरीदी-बिक्री करने वालों से भी मोटी रकम वसूली जाती है। सूत्रों का यह भी कहना है कि कमीशन के इस खेल में कुछ हिस्सा ऊपर तक पहुंचाया जाता है यही कारण है कि यहां दलालों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की जाती है।
भटकने से बचने के लिए दलालोें के चंगुल में फंस जाते हैं लोग
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार किसी भी प्रकार की भूमि की खरीदी-बिक्री होने पर उसकी रजिस्ट्री कराने का कार्य इतना पेचिदा है कि सामान्य आदमी रजिस्ट्री कार्यालय में भटकते ही रह जाता है लेकिन उसका कार्य नहीं हो पाता है। यहां कोई ऐसी व्यवस्था भी नहीं है कि जिससे लोगों को रजिस्ट्री कराने की सारी प्रक्रिया बताई जा सके। यही कारण है कि भटकने से बचने के लिए न चाहते हुए भी लोग दलालों के चंगुल में फंसने के लिए विवश हो जाते हैं।


