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‘नरसंहार’ की तर्ज पर ‘पर्यावरण संहार’ भी अपराध

  • पर्यावरण प्रदूषण और संरक्षण’ विषय पर राष्ट्रीय वेबीनार का आयोजन

राजनांदगांव। सोशल रिसर्च फाउंडेशन एवं स्वैच्छिक दुनिया (साप्ताहिक पत्र एवं न्यूज़ चैनल)  कानपुर उत्तर प्रदेश के संयुक्त तत्वाधान में ‘पर्यावरण प्रदूषण और संरक्षण’ विषय पर राष्ट्रीय वेबीनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के अध्यक्ष पूर्व कुलपति डॉ. अशोक कुमार निर्वाण, वि.वि.जयपुर संयोजक डॉ. राजीव मिश्रा एवं भावना निगम थे।

विशेष वक्ता डॉ. बी.नन्दा जागृत, सहा. प्रा. विभागाध्यक्ष पत्रकारिता शासकीय दिग्विजय महाविद्यालय राजनांदगांव एवं डॉ.नागरत्ना गनवीर शासकीय शिवनाथ विज्ञान महाविद्यालय, राजनांदगांव थे। डॉ. जागृत ने मानव जीवन में क्षिति,जल,पावक,गगन,समीरा जीवन के मूलभूत पांच तत्वों की महत्ता प्रतिपादित करते हुए उनकी शुद्धता को आवश्यक बताया। इनका प्रदूषित होना मानव एवं मानवेत्तर सभी प्राणियों के लिए कष्टदायक है। समताप मंडल में ओजोन परत में 2.5 करोड़ वर्ग मील का छिद्र पृथ्वी में तापमान की वृद्धि कर रहा है। ऋतुओं का समय चक्र बदल रहा है।
हमारे देश में गंगा जैसी पवित्र नदी प्रदूषित हो गयी। पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी ने 1979-80 में गंगा सफाई के लिए योजना रखी थी इस पर 1985-86 में कार्य प्रारंभ हुआ जो 2000 में बंद हो गया। संप्रति प्रधानमंत्री माननीय नरेन्द्र मोदी ने ‘नमामि गंगा योजना’ का प्रारंभ 2014 में किया है परन्तु गंगा की सफाई में अभी तक सफलता नहीं मिली। पर्यावरण केवल सरकार  का कार्य नहीं है। इसके प्रत्येक नागरिक उत्तरदायी है।
सन् 1970 से पर्यावरण संरक्षण के प्रयास विश्व स्तर पर भी लगातार हो रहे है। ओजोन परत को सही करने के लिए ‘मॉटियाल समझौता’ किया गया। विश्व में पानी स्थिति ऐसी है 3 अरब जनसंख्या पानी की समस्या से जूझ रही है। डेढ़ अरब आबादी सूखी के चपेट में है। विश्व के मात्र 3 प्रतिशत हिस्से पर इको सिस्टम अपने मौलिक स्वरूप में बचा है।
इन सब स्थितियों को देखते हुए वैश्विक स्तर पर ”स्टाफ इकोसाइन फाउंडेशन” के तहत ”नरसंहार” की तर्ज पर ”पर्यावरण संहार” शब्द की परिभाषा तैयार की है। जिसके नुकसान ऐसी कोई भी गतिविधि जिससे पर्यावरण या पारिस्थितिक तंत्र को गंभीर  और दीर्घकालिक नुकसान होने की संभावना दिखती है तो वह ‘पर्यावरण संहार” की श्रेणी में माना जायेगा।
उन्होंने कहा कि इन सारी समस्याओं को देखते हुए हमें पर्यावरण की स्वच्छता को आदत के रूप में अपनाना पड़ेगा जापान इसका अच्छा उदाहरण है।

By Amitesh Sonkar

Sub editor

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