राजनांदगांव। अन्य जिलों में डीईओ निलंबित हो रहे है, लेकिन राजनांदगांव के जिला शिक्षा अधिकारी पर शिक्षा विभाग मेहरबान है। बालोद के जिला शिक्षा अधिकारी अनुकंपा नियुक्ति में पैसे के लेन देन के प्रकरण में निलंबित हो गए तो बेमेतरा में प्रयोगशालीय सामाग्री खरीदी में अनियमितता पाए जाने पर जिला शिक्षा अधिकारी को निलंबित कर दिया गया वंही स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में नियुक्ति में गड़बड़ी हुई तो जशपूर के जिला शिक्षा अधिकारी को निलंबित कर दिया गया।
जिले के शिक्षा विभाग में विगत 19 महीनों में वेतन घोटाला, फर्नीचर घोटाला, बर्तन घोटाला, सामाग्री खरीदी घोटाला, अनुकंपा नियुक्ति घोटाला, ट्रांसफर पोस्टिंग घोटाला, प्रतिनियुक्ति घोटाला हुआ जिसकी अनेको लिखित शिकायत दस्तावेजी साक्ष्य के साथ प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से लेकर प्रमुख सचिव तक की गई। संभागिय कमीश्नर से लेकर शिक्षा संभाग संयुक्त संचालक तक शिकायत हुई, जांच के आदेश भी दिए गए लेकिन जांच तक नही हुआ। कार्यवाही करने मुख्यमंत्री कार्यालय ने स्कूल शिक्षा विभाग को निर्देशित भी किया लेकिन मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
मुख्यमंत्री के कार्यालय से जारी आदेश पर कार्यवाही नही होना समझ से परे है इतना ही नही छ.ग. विधान सभा के मानसून सत्र हो या शीतकालिन सत्र बर्तन खरीदी का मामला हो या अनुकंपा नियुक्ति हो या बंद प्रायवेट स्कूलों में अध्ययनरत् बच्चों की जानकारी, जानबूझकर मिथ्या और भ्रामक जानकारी दे दिया गया जबकि छ.ग. विधान सभा में मिथ्या या भ्रामक जानकारी देना गंभीर प्रवृति का अधराध है।

छत्तीसगढ़ पैरंेट्स एसोसियेशन के प्रदेश अध्यक्ष क्रिष्टोफर पॉल का कहना है की कानून से बड़ा कोई नही है, जिला शिक्षा अधिकारी राजनांदगांव हेतराम सोम द्वारा की जा रही वित्तीय अनियमित्ता ओर भ्रष्टाचार के संबंध में सभी जिम्मेदार उच्च अधिकारीयों को दस्तावेजी साक्ष्य दिया जा चूका है अब सिर्फ मुख्यमंत्री के आदेश का इंतजार हो रहा है। मुख्यमंत्री जिस दिन चाहे उस दिन सख्त कार्यवाही हो सकती है इसलिए पुनः मुख्यमंत्री को 19 महीनों में हुए घोटालों के दस्तावेजी साक्ष्य भेजा गया है और तत्काल निलंबन की मांग की गई है।


