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राजनांदगांव। पर्याप्त संख्या में सरकारी अस्पताल होने के बावजूद नगर निगम द्वारा सिटी डायग्नोस्टिक सेंटर (सीडीसी) बनाने के नाम पर लाखों रुपए की बर्बादी करने का मामला सामने आया है। सीडीसी का निर्माण नंदई वार्ड के सामुदायिक भवन में किया जा रहा है, जबकि यहां से महज 500 मीटर की दूरी पर जिला अस्पताल मौजूद है। इसके अलावा पेंड्री में दुर्ग संभाग का इकलौता मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल (एमसीएच) संचालित है। ऐसे में सीडीसी की आवश्यकता पर प्रश्न चिन्ह लग चुका है। सीधे कहे तो इस योजना से लोगों को कम, निजी लैब संचालकों को अधिक लाभ होगा।
अफसरों की माने तो इस योजना का उद्देश्य लोगों को सस्ते दर पर तमाम तरह की जांच सुविधा उपलब्ध कराना है। यहां पर बता दें कि जिला अस्पताल, एमसीएच, समेत तमाम सरकारी अस्पतालों में पहले से ही सस्ते दर पर जांच की सुविधा मरीजों को दी जा रही है। बीपीएल परिवार के मरीजों को नि:शुल्क जांच सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है। ऐसे में इस योजना का लाभ किसे अधिक होगा, इस पर गंभीर रूप से विचार करने की जरुरत है।

सरकारी अस्पतालों में पहले ही मेडिकल स्टॉफ का रोना
शहर के सरकारी अस्पताल पहले ही मेडिकल स्टॉफ की कमी से जूझ रहे है। स्टॉफ कम होने के कारण मरीजों को पूरी मेडिकल सुविधाएं नहीं मिल पा रही है। जिला अस्पताल में डॉक्टर की कमी के चलते महत्वपूर्ण जांच नहीं हो पा रहे है। ऐसे में एक और जांच सेंटर का संचालन कैसे किया जा सकेगा। कौन इसकी जिम्मेदारी लेगा इस पर भी बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। हालांकि अफसरों की माने तो जांच सेंटर का संचालन प्राइवेट कंपनियां करेंगी। ऐसे में प्राइवेट लैब संचालकों को लाभ मिलेगा। इसके बजाय शासन प्रशासन को सरकारी अस्पताल में स्टॉफ की कमी को दूर करने पर फोकस करना चाहिए था।

इधर, वार्डवासियों ने सामुदायिक भवन छिनने का किया विरोध
शहर के नंदई क्षेत्र के रहवासियों ने यहां सामुदायिक भवन को सिटी डायग्नोस्टिक सेंटर बनाए जाने का विरोध करते हुए भाजपा पार्षदों के साथ मंगलवार को नगर निगम का घेराव कर महापौर और आयुक्त के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
लोगों को स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने के उद्देश्य से नगर निगम द्वारा नई क्षेत्र में सीटी डायग्नोस्टिक सेंटर का निर्माण किया जा रहा है, लेकिन जिस जगह पर जांच केंद्र बनाया जा रहा है, उस जगह को लेकर वार्ड के लोगों ने विरोध जताया है। वार्डवासी बड़ी संख्या में भाजपा पार्षदों के साथ मंगलवार को नगर निगम पहुंचकर घेराव करते हुए निगम परिसर में ही बैठकर प्रदर्शन किया। इस दौरान आयुक्त और महापौर के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की गई।
नंदई क्षेत्र के लोगों और भाजपा पार्षद भानु साहू और विजय रॉय ने कहा कि हम स्वास्थ्य सुविधा के लिए बनाए जा रहे डायग्नोस्टिक सेंटर का विरोध नहीं कर रहे हैं, लेकिन जिस जगह पर यहां सेंटर बनाया जा रहा है, वह सामुदायिक भवन है, पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने क्षेत्र के लोगों को उनके सामाजिक, मांगलिक कार्य सहित विभिन्न कार्यक्रमों के आयोजन के लिए सामुदायिक भवन की सौगात दी थी, अगर नगर निगम को स्वास्थ्य जांच केंद्र बनाना है तो खाली जमीन पर नया भवन बना कर इसे संचालित करें। सामुदायिक भवन पर डायग्नोस्टिक सेंटर का निर्माण किए जाने की प्रक्रिया से नंदई क्षेत्र के लोगों में आक्रोश की स्थिति है। श्रमिक बाहुल्य क्षेत्र होने की वजह से सामुदायिक भवन में ही लोग अपने सामाजिक व मांगलिक कार्य संपन्न कराते हैं, ऐसे में सामुदायिक भवन क्षेत्र के लोगों से छीन जाने से यहां के लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा, जिसको लेकर लोगों ने विरोध के स्वर तेज किए हैं और सामुदायिक भवन पर डायग्नोस्टिक सेंटर निर्माण किए जाने से चक्काजाम करने की चेतावनी भी दी है।

सीधी बात: डॉ. आशुतोष चतुर्वेदी, आयुक्त, नगर निगम, राजनांदगांव
सवाल: 500 मीटर की दूरी में जिला अस्पताल और पेंड्री में मेडिकल कॉलेज अस्पताल होने के बावजूद नंदई में सीडीसी बनाने की योजना क्यों बनाई गई?
जवाब– यह सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है। इस सेंटर में लोगों की कम दर में जांच होगी।
सवाल: सीडीसी बना भी लिया तो डॉक्टर और अन्य तकनीकी स्टॉफ की पूर्ति निगम कैसे करेगा, यहां तो सरकारी अस्पताल ही डॉक्टर की कमी से जूझ रहा है?
जवाब: यहां जांच के लिए निजी फर्म से एमओयू होगा। यहां जांच के लिए शासन द्वारा शुल्क तय किया जाएगा, जो बहुत ही कम होगा।
सवाल: सस्ते दर पर जांच सुविधा उपलब्ध कराने की बात है तो सरकारी अस्पताल में यह सुविधा पहले से ही दी जा रही है, तो फिर सीडीसी में रुपयों की बर्बादी क्यों?
जवाब: सीडीसी का काम छह महीने पहले से चल रहा है। अब पूर्णता की ओर है। इसकी सभी को जानकारी है।
सवाल: सीडीसी बनाने के लिए सामुदायिक भवन को क्यों चुना गया, जबकि स्थानीय रहवासियों को भवन की जरुरत है?
जवाब: शहर के सभी वार्डों में सामुदायिक भवन है। कुछ जगहों पर दो भी है, लेकिन सीडीसी सेंटर एक ही जगह होगी, जिसका फायदा शहर सहित जिलेवासियों को मिलेगा।

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